क्या डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान पर चीन को दी छूट? जानें उनके विवादास्पद बयान
ट्रंप के बयान से बढ़ी वैश्विक चिंता
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक इंटरव्यू ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई के बाद, ट्रंप ने ताइवान के संदर्भ में ऐसे बयान दिए हैं, जिन्हें कई लोग चीन के साथ एक अनकही डील के रूप में देख रहे हैं।
ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताइवान पर कोई कदम उठाते हैं, तो यह पूरी तरह से उनके ऊपर निर्भर करेगा। इससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका की वेनेजुएला में हालिया जीत के बदले ट्रंप चीन को ताइवान पर कार्रवाई की अनुमति दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी
न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में ट्रंप ने अपनी शक्ति के बारे में खुलकर चर्चा की। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी वैश्विक शक्ति की कोई सीमा है, तो उन्होंने कहा कि केवल उनकी नैतिकता और बुद्धि ही उन्हें रोक सकती है। उन्होंने यह भी कहा, "मुझे अंतरराष्ट्रीय कानून की आवश्यकता नहीं है। मैं किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता।"
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी सरकार कानून का पालन करती है, लेकिन यह उनकी व्याख्या पर निर्भर करता है। यह बयान वेनेजुएला पर हमले के बाद आया है, जहां अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया।
ताइवान पर ढीला रुख
जब इंटरव्यू में ताइवान का मुद्दा उठाया गया, तो ट्रंप का जवाब चौंकाने वाला था। रिपोर्टर ने पूछा कि यदि चीन ताइवान पर हमला करता है, तो क्या होगा? ट्रंप ने कहा, "यह शी जिनपिंग पर निर्भर है कि वे क्या करते हैं। मैंने उनसे कहा है कि अगर ऐसा हुआ तो मैं बहुत नाराज होऊंगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे ऐसा करेंगे।"
उन्होंने वेनेजुएला को "असली खतरा" बताया और कहा कि ताइवान की स्थिति अलग है। कई विश्लेषक इसे इस तरह देख रहे हैं कि ट्रंप चीन को संकेत दे रहे हैं कि ताइवान पर कार्रवाई करने की छूट है, बशर्ते अमेरिका के हितों को नुकसान न पहुंचे।
ग्रीनलैंड और नाटो पर ट्रंप के विचार
ट्रंप से ग्रीनलैंड और नाटो के बारे में भी सवाल किए गए। उन्होंने ग्रीनलैंड पर पूर्ण स्वामित्व की बात दोहराई और कहा कि स्वामित्व मनोवैज्ञानिक रूप से सफलता के लिए आवश्यक है। नाटो को बचाने या ग्रीनलैंड हासिल करने में से क्या चुनेंगे, इस पर उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया, लेकिन संकेत दिया कि यह एक विकल्प हो सकता है।
ट्रंप ने यूरोप की आलोचना की और कहा कि अमेरिका ने नाटो को मजबूत किया है, लेकिन यूरोपीय देश पर्याप्त खर्च नहीं करते।
वैश्विक स्थिरता पर खतरा
ट्रंप के इन बयानों से दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। वेनेजुएला पर कार्रवाई को कई देश अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानते हैं। ताइवान के प्रति उनका रुख चीन को हरी झंडी दे सकता है। ग्रीनलैंड की चाहत नाटो को कमजोर कर रही है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की नीति ताकत और व्यक्तिगत फैसलों पर आधारित लगती है, जो वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है। क्या यह जिनपिंग के साथ कोई गुप्त समझौता है? आने वाला समय बताएगा।