क्या डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूक्लियर कोड तक पहुंचने की कोशिश की? जानें पूरी कहानी
अमेरिका में तनाव के बीच बड़ा खुलासा
नई दिल्ली: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका से एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। सीआईए के पूर्व अधिकारी लैरी जॉनसन ने बताया कि व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी। इस दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूक्लियर कोड तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन जनरल डैन केन ने उन्हें रोक दिया। इस पर दोनों के बीच बहस हुई, जिसके बाद ट्रंप को बैठक से बाहर कर दिया गया। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
ट्रंप की न्यूक्लियर कोड की आवश्यकता
यह घटना उस समय की है जब अमेरिका के दो एयर फोर्स स्टाफ ईरान में फंसे हुए थे और अमेरिका उस पर दबाव बना रहा था। लैरी जॉनसन का मानना है कि ट्रंप इसी कारण न्यूक्लियर विकल्प के बारे में जानकारी लेना चाहते थे।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने हाल ही में सिचुएशन रूम की बैठक की जानकारी दी थी, जिसमें कहा गया था कि ट्रंप काफी चिंतित और घबराए हुए थे। उन्हें सीमित जानकारी दी गई थी और बैठक से हटा दिया गया था, लेकिन इस रिपोर्ट में न्यूक्लियर कोड का उल्लेख नहीं था।
अमेरिका में परमाणु नियंत्रण की संरचना
2024 में पेंटागन ने कांग्रेस को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें बताया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति, जो सेना के कमांडर-इन-चीफ भी हैं, परमाणु हथियारों के उपयोग का अंतिम निर्णय ले सकते हैं। यह व्यवस्था 1948 के कानून पर आधारित है, लेकिन इसे गुप्त रखा जाता है।
राष्ट्रीय सैन्य कमान केंद्र (NMCC) परमाणु हथियारों के संचालन का कार्य करता है, लेकिन आदेश केवल राष्ट्रपति ही दे सकते हैं। निर्णय लेने से पहले राष्ट्रपति उप-राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, सेना प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से सलाह लेते हैं।
न्यूक्लियर कोड का प्रबंधन
न्यूक्लियर कोड एक विशेष बैग में रखा जाता है, जिसे 'न्यूक्लियर फुटबॉल' कहा जाता है। इस बैग में एक बिस्किट जैसा कार्ड होता है, जिसमें कोड लिखा होता है। पेंटागन का एक अधिकारी इसे हमेशा राष्ट्रपति के साथ रखता है। बैग में एक ब्लू बुक भी होती है, जो कोड के उपयोग में मदद करती है। शीत युद्ध के दौरान इस कोड को लेकर दो बार अलर्ट जारी किया गया था।
परमाणु हमले की प्रक्रिया
कोड सबसे पहले NMCC को भेजा जाता है। कम से कम दो बार कोड की जांच की जाती है। पूरी प्रक्रिया केवल 7 मिनट में पूरी करनी होती है। राष्ट्रपति को इतनी कम समय में निर्णय लेना होता है कि परमाणु हथियार का उपयोग किया जाए या नहीं। पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और जॉर्ज बुश ने इस समय सीमा की आलोचना की थी, उनका कहना था कि ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय के लिए अधिक समय मिलना चाहिए।