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क्या था ओमानी सह-पायलट का इरादा? जानिए Flydubai की उड़ान में हुई खतरनाक घटना

Flydubai की दुबई-तेल अवीव उड़ान में ओमानी सह-पायलट ने इजरायल में विमान को जानबूझकर गिराने की योजना का खुलासा किया है। कैप्टन स्मित मच्छार पर हुए हमले के बाद उनकी बहादुरी की सराहना की जा रही है। जानें इस खतरनाक घटना के पीछे की पूरी कहानी और सह-पायलट के कट्टरपंथी अतीत के बारे में।
 

दुबई-तेल अवीव उड़ान में खतरनाक मंसूबे


नई दिल्ली: Flydubai की दुबई से तेल अवीव जाने वाली उड़ान में भारतीय मूल के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर हमले के आरोपी ओमानी सह-पायलट ने एक गंभीर खुलासा किया है। रिपोर्टों के अनुसार, उसने अधिकारियों को बताया कि उसका इरादा विमान को इजरायल में दुर्घटनाग्रस्त करने का था और उसे अपनी जान की परवाह नहीं थी। इस बयान ने घटना की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के अनुसार, सह-पायलट का नाम हमाम अल-हमामी है। सऊदी अरब के अधिकारियों ने उससे पूछताछ के दौरान इस घटना के बारे में सवाल किए, जिसमें उसने जानबूझकर विमान को इजरायल में गिराने की इच्छा व्यक्त की।


हमाम का कट्टरपंथी अतीत

हमाम ओमान का नागरिक है, लेकिन उसने काफी समय विदेश में बिताया है। उसकी मां सीरिया से थीं और वह लंबे समय तक वहां रहा। रिपोर्ट के अनुसार, वहीं उसके अंदर कट्टरपंथी विचार विकसित हुए। 2024 में Oman Air के साथ काम करते समय उसके पास कथित तौर पर चरमपंथी सामग्री भी पाई गई थी, जिसके बाद उसे अपने देश में विमान उड़ाने से रोक दिया गया था।


कॉकपिट में हमले की घटना

संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने इस घटना को संभावित आतंकवादी साजिश से जोड़ा है। बताया गया है कि हमाम ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर इमरजेंसी कुल्हाड़ी से हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की।


हमले में मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने संघर्ष करते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता प्राप्त की। बाद में यात्रियों ने उन्हें घायल अवस्था में देखा।


कैप्टन मच्छार की बहादुरी की सराहना

इस घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की विश्वभर में प्रशंसा की गई। उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत करते हुए बताया कि हमामी ने प्रार्थना के लिए समय मांगने के बाद उनके सिर के पीछे हमला किया था।


मच्छार ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि विमान को कोई बड़ा नुकसान हुआ है, लेकिन लगातार हमलों के बाद उन्हें समझ आया कि खतरा विमान में नहीं, बल्कि कॉकपिट में मौजूद सह-पायलट से था। उनकी सूझबूझ और साहस ने विमान में सवार यात्रियों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।