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क्या पुतिन की भारत यात्रा से ब्रिक्स सम्मेलन में बढ़ेगा वैश्विक सहयोग?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल के अंत में भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आ रहे हैं। यह उनकी एक वर्ष में दूसरी यात्रा है, जो भारत और रूस के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाती है। भारत सितंबर 2026 में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा, जिसमें प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल होंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा और सहयोग को बढ़ावा देना है। जानें ब्रिक्स का महत्व और पुतिन की यात्रा से क्या उम्मीदें हैं।
 

पुतिन का भारत दौरा और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन


रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस वर्ष के अंत में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आने वाले हैं। यह यात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक वर्ष में उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी, जो दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाती है।


क्रेमलिन ने इस दौरे की पुष्टि की है। राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया है कि पुतिन इस शिखर सम्मेलन में "निश्चित रूप से" शामिल होंगे। वर्तमान में जब वैश्विक स्तर पर कई अनिश्चितताएँ हैं, यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है.


भारत में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

भारत सितंबर 2026 में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में होगा, जिसमें दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल होंगे। भारत इस समय ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है, इसलिए इस सम्मेलन की जिम्मेदारी भी उसी के पास है। यह मंच वैश्विक मुद्दों पर चर्चा और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है.


पुतिन की दूसरी यात्रा

पुतिन ने इससे पहले दिसंबर 2025 में भारत का दौरा किया था। उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना था। यह दौरा भारत और रूस के बीच 25 साल पुराने विशेष संबंधों की सालगिरह के अवसर पर भी हुआ था, जिसकी शुरुआत 2000 में हुई थी.


ब्रिक्स का महत्व

ब्रिक्स एक ऐसा समूह है जिसमें तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। प्रारंभ में इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे, और बाद में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से इसे ब्रिक्स नाम दिया गया। अब इस समूह में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देश भी शामिल हो चुके हैं, जिससे यह 11 देशों का एक बड़ा मंच बन गया है।


यह समूह वैश्विक राजनीति, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और विकास जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करता है। इसका उद्देश्य दुनिया में संतुलन बनाए रखना और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त करना है.


ब्रिक्स की शुरुआत

ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इन देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसका पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद यह समूह और मजबूत हुआ। हाल के वर्षों में इसमें नए सदस्य और साझेदार देश भी शामिल हुए हैं, जिससे इसकी वैश्विक अहमियत और बढ़ गई है.


भारत की अध्यक्षता और एजेंडा

जनवरी 2026 से भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इस बार शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय है- "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण।" भारत इस मंच के जरिए विशेष रूप से विकासशील देशों के मुद्दों को उठाने पर जोर दे रहा है।


इसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम किया जाएगा, जैसे- वैश्विक शासन में सुधार, आर्थिक मजबूती, स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, स्वास्थ्य सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, जलवायु वित्त और ऊर्जा परिवर्तन। साथ ही सदस्य देशों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा.


ब्रिक्स सम्मेलन का समय

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया में आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। यह मंच देशों को एक साथ लाकर साझा समाधान खोजने का अवसर प्रदान करता है। पुतिन की भारत यात्रा और इस सम्मेलन में उनकी भागीदारी से यह स्पष्ट है कि भारत और रूस के रिश्ते मजबूत बने हुए हैं। साथ ही यह भी संकेत मिलता है कि आने वाले समय में ब्रिक्स समूह की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है.