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क्या भारत के निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ का असर पड़ेगा? जानें पूरी कहानी

अमेरिका की सीनेट ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव पारित किया है, जिससे भारत के निर्यात पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यदि यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो भारतीय उत्पादों की कीमतें अमेरिका में बढ़ सकती हैं, जिससे उनकी मांग प्रभावित हो सकती है। जानें इस प्रस्ताव के पीछे के कारण और भारत पर इसके संभावित प्रभाव के बारे में।
 

अमेरिका का नया प्रस्ताव और भारत की चिंता


नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की योजना ने भारत के निर्यात क्षेत्र में चिंता की लहर पैदा कर दी है। अमेरिकी सीनेट द्वारा इस प्रस्ताव को पारित करने के बाद, भारतीय उत्पादों पर भी भारी टैरिफ लगने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इससे अमेरिका में भारतीय सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे उनकी मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


सीनेट का प्रस्ताव और इसके संभावित प्रभाव

अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव बड़े बहुमत से पारित किया है। यह प्रस्ताव अब सितंबर में प्रतिनिधि सभा में पेश किया जाएगा। यदि वहां से मंजूरी मिलती है, तो यह राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद, यह कानून का रूप ले सकता है। इस कदम का उद्देश्य यूक्रेन पर हमले के लिए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उन देशों पर कार्रवाई करना है, जो रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखे हुए हैं।


भारत पर संभावित प्रभाव

यूक्रेन युद्ध के आरंभ के बाद से, भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की खरीद जारी रखी है। यदि यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो अमेरिका भारतीय उत्पादों पर भी 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है। इससे भारत से अमेरिका में निर्यात होने वाले कई सामान की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है, और निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने भी इसी तरह की चिंताओं को व्यक्त किया है। संस्था के अनुसार, 2026 में भारत ने रूस से लगभग 40.08 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा है।


भारत का रूस से तेल खरीदने में स्थान

रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में भारत का स्थान चीन के बाद आता है। रूस से सस्ता तेल मिलने के कारण भारत को ऊर्जा लागत को नियंत्रित करने में मदद मिली है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के बावजूद घरेलू पेट्रोलियम कीमतों पर दबाव सीमित रखने में सहायता मिली है, जिससे महंगाई को काबू में रखने में भी मदद मिली है।


GTRI की चिंता

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि चीन भारत से अधिक रूसी तेल खरीदता है, फिर भी अमेरिकी टैरिफ का खतरा भारत के लिए अधिक गंभीर हो सकता है। उनके अनुसार, इसका एक बड़ा कारण अमेरिकी बाजार में चीनी उत्पादों की विविधता और मजबूत मांग है। ऐसे में यदि भारत पर भारी शुल्क लगाया जाता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार और कीमत दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।