×

क्या भारत को रूसी तेल खरीदने पर अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा?

अमेरिका द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की योजना के बीच भारत की स्थिति पर चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। अमेरिकी सीनेट ने एक विधेयक पारित किया है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। जानें कि यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है और इस मुद्दे पर बातचीत के जरिए समाधान की संभावना क्या है।
 

भारत और अमेरिका के बीच तेल व्यापार पर नई चर्चाएँ


नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा रूस से कच्चे तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कदम उठाने के बीच भारत की स्थिति पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिका, रूस के प्रमुख तेल खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। इस संदर्भ में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत-अमेरिका संबंधों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है।


व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए नवारो ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे कार्य संबंध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नेता इस मुद्दे को आपस में सुलझा सकते हैं और किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा। नवारो ने एक पुरानी रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से तेल व्यापार में सक्रिय नहीं था, लेकिन युद्ध के बाद भारत ने रूसी तेल से बने रिफाइंड उत्पादों का व्यापार बढ़ाया है। उनके अनुसार, इससे रूस की युद्ध क्षमता को आर्थिक सहायता मिली है।


अमेरिकी सीनेट का महत्वपूर्ण विधेयक

7 अगस्त को अमेरिकी सीनेट ने एक महत्वपूर्ण विधेयक को 86-11 के वोट से पारित किया। इस कानून के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत और चीन इस सूची में शामिल हैं। 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' का उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। प्रस्ताव में यह तर्क दिया गया है कि रूस से ऊर्जा खरीद उसके राजस्व को मजबूत करती है, जिसका उपयोग यूक्रेन में चल रहे सैन्य अभियान के लिए किया जा सकता है।


पुतिन और रूसी तेल व्यापार पर नए प्रतिबंध

इस विधेयक में केवल तेल खरीदने वाले देशों को ही नहीं, बल्कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा परियोजनाओं पर नए प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है। इसके अलावा, ऐसे पुराने और दूसरे झंडे के तहत चलने वाले तेल टैंकरों पर कार्रवाई बढ़ाने की बात कही गई है, जो प्रतिबंधों से बचकर रूस के लिए ऊर्जा से कमाई करने में मदद करते हैं।


भारत के लिए रूसी तेल का महत्व

भारत ने 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के आरंभ के बाद रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी। इससे भारतीय रिफाइनरियों को कम कीमत पर कच्चा माल मिला और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिली। अमेरिकी प्रस्ताव के तहत, भारत के सामने सस्ते रूसी तेल की खरीद और अमेरिकी बाजार तक पहुंच बनाए रखने के बीच एक चुनौती उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, नवारो के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे को बातचीत के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जा सकता है।