क्या भारत चीन के सामान को अमेरिकी टैरिफ से बचाने में मदद कर रहा है? जानें पूरी कहानी
अमेरिका-भारत के बीच टैरिफ विवाद फिर से गरमाया
नई दिल्ली: अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर चल रहा तनाव एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में वॉशिंगटन ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह चीन के सामान को अमेरिकी शुल्क से बचाने में सहायता कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने अपनी रिपोर्ट 'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम' में भारत सहित 40 से अधिक देशों का उल्लेख किया है।
रिपोर्ट में चीन के शैडो नेटवर्क का खुलासा
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इन देशों के माध्यम से अपने सामान को अमेरिकी बाजार में पहुंचाने का प्रयास करता है ताकि भारी टैरिफ से बचा जा सके। नवारो के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए हर साल लगभग 40 अरब से 303 अरब डॉलर तक का चीनी सामान अमेरिका भेजा जा सकता है। इसे चीन का 'शैडो ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क' कहा गया है।
भारत पर आरोपों की बारीकी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन से आने वाले सामान में दूसरे देशों में मामूली बदलाव किए जाते हैं, जैसे हल्की प्रोसेसिंग, नई पैकिंग, लेबल में बदलाव या सामान के मार्ग में परिवर्तन। इसके बाद इन्हें स्थानीय उत्पाद के रूप में अमेरिकी बाजार में भेजा जाता है। नवारो ने भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई औद्योगिक क्षेत्र का भी उल्लेख किया है, जहां चीन से आने वाले पंप और कंप्रेसर जैसे उत्पादों में मामूली बदलाव करके उन्हें भारतीय उत्पाद के रूप में अमेरिका भेजा जा सकता है। हालांकि, भारत की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अन्य देशों का भी जिक्र
नवारो ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चीन लंबे समय से तीसरे देशों के माध्यम से अमेरिकी टैरिफ से बचने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में भारत के अलावा मैक्सिको, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ जैसे कई देशों का नाम लिया गया है। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण चीनी कंपनियां सीधे अमेरिका में सामान भेजने पर लगने वाले अधिक शुल्क से बच सकती हैं।
AI की मदद से संदिग्ध सामान की पहचान
अमेरिका अब ऐसे मामलों पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट में 'डिटेक्टिव बॉर्डर' नामक AI आधारित प्रणाली का उल्लेख किया गया है। यह प्रणाली शिपमेंट के मार्ग, उत्पाद की श्रेणी, कंपनियों के बीच संबंध और उनकी उत्पादन क्षमता जैसे आंकड़ों का विश्लेषण करेगी। संदिग्ध लेनदेन की पहचान होने पर अमेरिकी अधिकारी अतिरिक्त शुल्क, जुर्माना या सामान को बाजार में प्रवेश से रोकने जैसी कार्रवाई कर सकते हैं।