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क्या भारत पर अमेरिकी टैरिफ में होगा बदलाव? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद की स्थिति

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा लगाए गए पारस्परिक टैरिफ को अवैध ठहराया है, जिससे भारत पर लागू 18% टैरिफ की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। क्या यह टैरिफ घटकर 10% या 13.5% होगा? जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर पूरी जानकारी और संभावित बदलावों के बारे में।
 

अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव: भारत की स्थिति


नई दिल्ली: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में टैरिफ को एक महत्वपूर्ण आर्थिक उपकरण के रूप में उपयोग किया। उन्होंने ट्रेड वॉर से लेकर रूस-यूक्रेन संघर्ष तक, कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर टैरिफ नीति के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिश की। भारत भी इस कड़ी अमेरिकी टैरिफ नीति से प्रभावित हुआ है।


हाल ही में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए पारस्परिक टैरिफ को अवैध ठहराया है, जिससे भारत पर लागू टैरिफ को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत पर 18% टैरिफ जारी रहेगा या इसे घटाकर 10% या 13.5% किया जाएगा। आइए इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।


अमेरिकी टैरिफ का इतिहास: भारत पर प्रभाव

डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में वैश्विक स्तर पर टैरिफ लगाने की प्रक्रिया शुरू की थी। प्रारंभ में भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया, जिसे बाद में अगस्त में बढ़ाकर 50% कर दिया गया। इसका कारण बताया गया कि भारत रूस से तेल आयात कर रहा है, जिससे वह यूक्रेन-रूस युद्ध में रूस की सहायता कर रहा है। इसी आधार पर 25% अतिरिक्त शुल्क भी जोड़ा गया।


50% टैरिफ लागू होने के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया, जिससे व्यापारिक समझौतों पर भी असर पड़ा। हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच सहमति बनने पर ट्रंप ने अचानक टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा, जिसके बाद अतिरिक्त 25% शुल्क समाप्त कर दिया गया।


सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का प्रभाव

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को रद्द करते हुए कहा कि राष्ट्रपति शांति काल में 50 साल पुराने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का उपयोग कर इस तरह के टैरिफ लागू नहीं कर सकते। इस निर्णय के बाद भारत पर लागू 18% टैरिफ का कानूनी आधार समाप्त हो गया है।


यदि 18% टैरिफ को निरस्त माना जाता है, तो भारत पर वही शुल्क लागू होगा जो उसे मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा प्राप्त होने के कारण देना पड़ता था, यानी लगभग 3.5%।


ग्लोबल टैरिफ और नई स्थिति

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद, ट्रंप ने धारा 122 का उपयोग करते हुए 10% ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा की। यह धारा राष्ट्रपति को 150 दिनों तक अधिकतम 15% शुल्क लगाने की अनुमति देती है, जिसके बाद कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होती है।


इस स्थिति में, यदि भारत पर 3.5% मूल शुल्क के साथ 10% अतिरिक्त ग्लोबल टैरिफ जोड़ा जाता है, तो कुल अमेरिकी टैरिफ 13.5% तक पहुंच सकता है।


ट्रंप और व्हाइट हाउस के संकेत

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि भारत पर टैरिफ पहले से तय व्यापार समझौते के अनुसार 18% ही रहेगा। हालांकि, व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट किया कि कानूनी स्थिति के अनुसार फिलहाल भारत पर 10% टैरिफ लागू होगा।


इस प्रकार, भारत पर अमेरिकी टैरिफ की स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद इसका ढांचा निश्चित रूप से बदल चुका है।