क्या भारतीय जहाजों ने ईरान को भुगतान किया? सरकार ने किया स्पष्ट
भारत सरकार का स्पष्टीकरण
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को उन सभी खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें यह दावा किया गया था कि भारतीय जहाजों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान को नकद या क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान किया। सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव के बीच ऐसे आरोप पूरी तरह से निराधार हैं।
भारत को सफाई देने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
भारत सरकार की ओर से यह स्पष्टीकरण 18 अप्रैल की घटना के बाद आया है, जब भारतीय झंडे वाले दो जहाजों को ईरानी सेना की गोलीबारी के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लौटना पड़ा।
इस घटना ने समुद्री क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी थी और दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्ग की सुरक्षा पर सवाल उठाए थे। इसके साथ ही, इस घटना को क्रिप्टो घोटाले से जोड़ने की अटकलें भी सामने आईं। रिपोर्टों में कहा गया कि धोखेबाज जहाज मालिकों को क्रिप्टो भुगतान के बदले सुरक्षित मार्ग का आश्वासन दे रहे थे।
भारत सरकार का स्पष्ट बयान
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा, "खबरें आईं कि 'सनमार हेराल्ड' के कप्तान ने IRGC नेवी के प्रतिनिधियों को अमेरिकी डॉलर दिए और साइबर ठगी का शिकार हुए। हमने जहाज मालिक से बात की, जिन्होंने पुष्टि की कि यह पूरी तरह से गलत है।"
उन्होंने आगे कहा कि कोई सत्यापित जानकारी नहीं है जो यह दर्शाए कि भारतीय जहाजों ने सुरक्षित मार्ग के लिए किसी को भुगतान किया। "जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं, हमारे पास कोई नया डेटा या पुष्टि नहीं है कि हमारे किसी जहाज ने इस काम के लिए किसी अथॉरिटी को भुगतान किया हो," उन्होंने कहा।
चेन्नई की 'सनमार शिपिंग' ने भी इस मामले में बयान जारी कर खबरों को गलत बताया। कंपनी ने कहा, "सोशल मीडिया पर चल रही खबरें कि हमारा क्रूड कैरियर सनमार हेराल्ड क्रिप्टो स्कैम का शिकार हुआ, पूरी तरह से झूठी हैं।" कंपनी ने यह भी बताया कि वह जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।