क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव ला रहा है रूस? पुतिन का बड़ा बयान
रूस का आर्थिक चुनौती का ऐलान
नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रभुत्व को चुनौती देते हुए कहा है कि अब अमेरिकी डॉलर और यूरो पर से विश्व का विश्वास हमेशा के लिए समाप्त हो गया है।
पुतिन का बयान: पश्चिमी देशों की नीति पर प्रहार
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने उनके अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार दी है। इस महत्वपूर्ण सत्र का संचालन भारत की प्रमुख पत्रकार गीता मोहन ने किया।
पश्चिमी देशों के प्रति अविश्वास
पुतिन ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन संकट के बाद रूस के रिजर्व फंड को फ्रीज करना एक प्रकार की चोरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश पश्चिमी हितों के खिलाफ जाएगा, उसके लिए सेटलमेंट और तकनीकी सहायता तुरंत बंद कर दी जाएगी। इसी कारण 'ग्लोबल साउथ' और ब्रिक्स देश डॉलर के विकल्प की ओर बढ़ रहे हैं।
राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार का बढ़ता चलन
दुनिया भर के देश अब व्यापार के लिए अपनी स्थानीय करेंसी और डिजिटल वित्तीय संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। रूस इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जो अपने कुल निर्यात का लगभग 65 प्रतिशत लेन-देन अब अपनी राष्ट्रीय मुद्रा 'रूबल' में कर रहा है। पुतिन का मानना है कि जल्द ही वैश्विक व्यापार से डॉलर का प्रभुत्व समाप्त हो जाएगा।
ब्रिक्स का उभार: G7 से आगे
पुतिन ने आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ब्रिक्स समूह अब मध्य पूर्व के G7 से काफी आगे निकल चुका है।
वैश्विक जीडीपी ग्रोथ: पिछले पांच वर्षों में ब्रिक्स की हिस्सेदारी 49% रही है, जबकि G7 का योगदान केवल 18% रह गया है।
क्रय शक्ति: पीपीपी के आधार पर ब्रिक्स का हिस्सा 40% हो चुका है, जबकि G7 का हिस्सा 20% से भी कम हो गया है।
भविष्य की रफ्तार: ब्रिक्स देशों की विकास दर 4% रहने का अनुमान है, जबकि G7 की केवल 1.1% रहने की संभावना है।
नए व्यापारिक रास्तों का उदय
पुतिन ने बताया कि विश्व व्यापार का केंद्र अब पश्चिम से पूर्व और दक्षिण की ओर स्थानांतरित हो गया है। 'नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर' और 'ट्रांस-आर्कटिक ट्रांसपोर्टेशन रूट' जैसे नए मार्ग पश्चिमी नियंत्रण वाले हब्स को दरकिनार कर रहे हैं। उन्होंने डब्ल्यूटीओ जैसी संस्थाओं पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि जब तक पश्चिम को लाभ था, तब तक उन्होंने नियमों का पालन किया, लेकिन प्रतियोगिता में पिछड़ते ही नियमों का उल्लंघन करना शुरू कर दिया।