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क्या सऊदी अरब की चीन से बढ़ती नजदीकियां बन रही हैं खतरे की वजह?

सऊदी अरब और चीन के बीच बढ़ती दोस्ती के बीच, हूती विद्रोहियों के हमलों में वृद्धि ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हूती विद्रोही चीन से प्राप्त पुर्जों का उपयोग कर उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें बना रहे हैं, जो सऊदी अरब के लिए खतरा बन सकती हैं। जानें इस रिपोर्ट में क्या कहा गया है और सऊदी-चीन संबंधों का क्या प्रभाव पड़ सकता है।
 

सऊदी अरब और चीन के रिश्तों पर खतरा


नई दिल्ली: क्या सऊदी अरब की चीन के साथ बढ़ती दोस्ती उसे महंगी पड़ रही है? यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी पर बढ़ते हमलों के बीच एक नई रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हूती विद्रोही चीन से प्राप्त पुर्जों का उपयोग कर अपनी उन्नत मध्यम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें बना रहे हैं, जो सऊदी अरब के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती हैं।


रिपोर्ट में क्या जानकारी दी गई?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च' नामक संगठन ने यह जानकारी साझा की है। यह संगठन संघर्ष क्षेत्रों में हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला पर नजर रखता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हूतियों ने एक चीनी सप्लायर से कई ऐसे पुर्जे मंगवाए हैं, जिनका उपयोग ईरान की शक्तिशाली मिसाइल 'खैबर शेकन' के वर्जन को बनाने में किया जा सकता है।


यदि हूती इस मिसाइल को बनाने में सफल होते हैं, तो इसकी रेंज लगभग 1,200 मील (लगभग 2,000 किलोमीटर) होगी। इसका अर्थ है कि पूरा सऊदी अरब और इजरायल इसके दायरे में आ जाएंगे। संगठन के सीनियर एनालिस्ट फैबियन हिंज के अनुसार, हूतियों के हथियार निर्माण के ठिकाने इतने गुप्त हैं कि यह जानना मुश्किल है कि उत्पादन कितना आगे बढ़ चुका है।


चीनी कंपनियों से मिल रहा है सबसे अधिक सामान

शिपिंग दस्तावेजों से एक चीनी प्रिसिजन-मेटल बनाने वाली कंपनी की पहचान हुई है, हालांकि रिपोर्ट में उसका नाम नहीं दिया गया है। यूएन की रिपोर्ट और विशेषज्ञों के आंकड़ों से पता चलता है कि हूतियों के लिए जब्त सामान का सबसे बड़ा स्रोत अब चीनी कंपनियां बन गई हैं। अमेरिका ने हूतियों को ड्रोन के पुर्जे देने वाली जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें अधिकांश चीन की हैं। यूएन के पूर्व विशेषज्ञ हेनरी थॉम्पसन ने कहा कि हूती कम से कम दो वर्षों से चीन से ठोस-ईंधन मिसाइलों के पुर्जे मंगा रहे हैं।


सऊदी-चीन संबंधों का विकास

पिछले दशक में सऊदी अरब और चीन के बीच संबंध काफी मजबूत हुए हैं। 2016 में दोनों देशों ने एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की, जिसके बाद 2024 में दोनों के बीच व्यापार 107.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सऊदी अरब चीन को तेल प्रदान करता है, और चीन सऊदी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।


हालांकि, चीन का कहना है कि वह हूतियों पर लगे यूएन प्रतिबंधों का पालन कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंगाए गए कई पुर्जे 'डुअल-यूज' हैं, जिनका सामान्य और सैन्य दोनों तरह से उपयोग किया जा सकता है, लेकिन कुछ पुर्जे केवल मिसाइलों के लिए ही बनाए गए थे। विशेषज्ञ माइकल नाइट्स का मानना है कि यह दर्शाता है कि बीजिंग के पास अपनी डुअल-यूज तकनीक के अंतिम उपयोग को रोकने की न तो इच्छा है और न ही साधन।