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क्या सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले से बढ़ेगा वैश्विक ऊर्जा संकट?

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। इस हमले के चलते कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है। सऊदी अरब का उत्पादन 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे महंगाई का खतरा भी बढ़ सकता है, विशेषकर उन देशों के लिए जो तेल आयात पर निर्भर हैं।
 

तेल मार्गों पर बढ़ता संकट


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का प्रभाव अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदेब के बाद, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले ने चिंता को और बढ़ा दिया है। इन महत्वपूर्ण तेल मार्गों में रुकावट से पहले से ही प्रभावित कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर और अधिक दबाव पड़ने की संभावना है।


सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का अस्थायी बंद

सऊदी अरब की लगभग 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। यह पाइपलाइन देश के तेल क्षेत्रों से लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक प्रतिदिन लगभग 40 लाख बैरल कच्चा तेल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस मार्ग के बंद होने से सऊदी अरब के निर्यात स्टॉक पर भी सवाल उठने लगे हैं।


क्या केवल 5-7 दिन का स्टॉक बचा है?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यानबू के आसपास सऊदी अरब के अनुमानित 3.5 करोड़ बैरल भंडारण में से केवल पांच से सात दिनों के निर्यात के बराबर स्टॉक ही शेष है। मिस्र के ऐन सुखना और सिदी केरीर बंदरगाहों पर मौजूद अतिरिक्त भंडार कुछ और दिनों का सहारा दे सकता है। हालांकि, सऊदी सरकार ने नुकसान और उपलब्ध स्टॉक के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।


1990 के बाद सबसे कम तेल उत्पादन

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में सऊदी अरब का कच्चे तेल का उत्पादन घटकर लगभग 62.40 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो 1990 के बाद का सबसे निचला स्तर है। जुलाई की तुलना में उत्पादन में लगभग 19 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आई है। इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी देखा जा रहा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 109 डॉलर, WTI की कीमत करीब 103 डॉलर और मुर्बान क्रूड की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।


महंगाई का खतरा

विशेषज्ञों की चिंता केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है। यदि आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा बनी रहती है, तो ईंधन महंगा हो सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा है। तेल आयात पर निर्भर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ सकता है।