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क्या है पीएम मोदी की 'कारपूल कूटनीति' और इसके पीछे का राज़?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति में व्यक्तिगत संबंधों का महत्व बढ़ता जा रहा है। 'कारपूल कूटनीति' के तहत मोदी ने कई विदेशी नेताओं के साथ एक ही वाहन में यात्रा की है, जिससे रिश्तों में आत्मीयता और विश्वास का संकेत मिलता है। इस लेख में जानें कि कैसे मोदी ने ओबामा, पुतिन और अन्य नेताओं के साथ साझा सफर किया और यह कैसे भारत की विदेश नीति को नया आयाम दे रहा है।
 

भारत की कूटनीति में व्यक्तिगत संबंधों का महत्व


नई दिल्ली: दुनिया की राजनीति में केवल औपचारिक बयान और समझौते ही रिश्तों की गहराई नहीं दर्शाते, बल्कि नेताओं का व्यवहार और आपसी संबंध भी महत्वपूर्ण होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल में कई बार ऐसे संकेत दिए हैं, जो भारत और अन्य देशों के बीच संबंधों की मजबूती को दर्शाते हैं। कभी किसी विदेशी नेता को 'मेरा प्रिय मित्र' कहकर संबोधित करना, तो कभी किसी राष्ट्राध्यक्ष के साथ सहजता से यात्रा करना, मोदी की कूटनीति में व्यक्तिगत संबंधों की झलक मिलती है।


पीएम मोदी के विशेष संबोधन

प्रधानमंत्री मोदी अपने विशेष संबोधनों के लिए लंबे समय से चर्चा में हैं। उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को कई बार 'मेरे भाई' कहा, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन को 'मेरा प्रिय मित्र' कहकर संबोधित किया। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जहां औपचारिकता अधिक होती है, वहां इस तरह की आत्मीयता भारत के मजबूत रिश्तों को एक अलग पहचान देती है।


हाल के समय में मोदी ने एक नई शैली अपनाई है, जिसे 'कारपूल कूटनीति' कहा जा रहा है। इसमें वह चुनिंदा विदेशी नेताओं के साथ एक ही वाहन में यात्रा करते हैं। यह दृश्य केवल प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं होते, बल्कि नेताओं के बीच व्यक्तिगत विश्वास और सहजता का संकेत भी देते हैं।


ओबामा के साथ कार यात्रा

इसकी शुरुआत 2014 में हुई थी, जब मोदी ने अमेरिका दौरे के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ एक ही कार में यात्रा की थी। उस समय यह तस्वीर काफी चर्चित रही थी। बाद में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सफर के दौरान मोदी ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति की लिमोजिन 'द बीस्ट' उनके गुजरात स्थित माता-पिता के घर जितनी बड़ी है।


इसके बाद 2025 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की कारपूलिंग ने सुर्खियां बटोरीं। दोनों नेता बैठक स्थल तक एक ही गाड़ी में पहुंचे थे। बाद में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों साथ नजर आए।




कीर स्टार्मर के साथ पीएम मोदी का साझा सफर

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ मुंबई में मोदी का साझा सफर भी काफी चर्चित रहा। वहीं जॉर्डन के क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय ने अम्मान यात्रा के दौरान खुद कार चलाकर मोदी को अपने साथ ले जाकर खास सम्मान दिया।




अन्य देशों के नेताओं के साथ मोदी की कारपूलिंग

इथियोपिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री अबी अहमद ने खुद मोदी को होटल तक छोड़ा और उन्हें शहर के कई महत्वपूर्ण स्थान भी दिखाए। फ्रांस यात्रा के दौरान मोदी और मैक्रॉन की दोस्ताना केमिस्ट्री भी खुलकर सामने आई, जब दोनों एक साथ कार में सफर करते नजर आए।




इसके अलावा जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ भी मोदी की कारपूलिंग चर्चा का विषय बनी। इन तस्वीरों और मुलाकातों ने यह संकेत दिया कि भारत की विदेश नीति अब केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास और मजबूत रिश्तों पर भी आधारित है।