क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव अमेरिका और ईरान के बीच नई लड़ाई का संकेत है?
अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच तनाव
नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच तनाव एक बार फिर से स्पष्ट हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि तीन अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला किया गया, लेकिन अमेरिकी नौसेना को कोई नुकसान नहीं हुआ।
ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने इस घटना के बाद ईरान के खिलाफ कड़े शब्दों में कहा कि ईरान का नेतृत्व 'पागलों' के हाथ में है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने शीघ्र शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए, तो उसे और भी 'हिंसक' परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
हमले की पुष्टि
गुरुवार को ट्रंप ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाया गया था। उनके अनुसार, ईरानी सेना द्वारा किए गए हमले को अमेरिकी बलों ने पूरी तरह से विफल कर दिया।
उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में 'ईरानी हमलावरों' को भारी नुकसान हुआ और उनकी कई छोटी नौकाएं नष्ट कर दी गईं।
ट्रंप का तीखा बयान
अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर हमला करते हुए कहा कि यदि उन्हें परमाणु हथियारों का उपयोग करने का मौका मिला, तो वे ऐसा करने से नहीं चूकेंगे।
उन्होंने कहा, "हमारे विध्वंसक पोतों पर मिसाइलें दागी गईं, और उन्हें आसानी से नष्ट कर दिया गया। इसी तरह, ड्रोन आए, और हवा में ही जलकर राख हो गए।"
ट्रंप ने आगे कहा, "एक सामान्य देश इन विध्वंसक पोतों को गुजरने देता, लेकिन ईरान सामान्य देश नहीं है। उनका नेतृत्व पागलों द्वारा किया जा रहा है।"
झड़प का स्थान
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह टकराव होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित क़ेशम द्वीप के पास हुआ। इस द्वीप पर लगभग 15 लाख लोग निवास करते हैं और यहां एक जल विलवणीकरण संयंत्र भी है।
ईरान लंबे समय से होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण चाहता है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव
जहां ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है, वहीं अमेरिका चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहे और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहे।
दोनों देशों के बीच तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी तनाव बना हुआ है। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जबकि ईरान का कहना है कि उनका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग के लिए है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से शांति वार्ता के लिए भेजे गए संदेशों की समीक्षा की जा रही है।
बगाई ने कहा कि ईरान "अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है, और अमेरिकी पक्ष को कोई जवाब नहीं दिया गया है।"