×

क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट से बढ़ेंगी तेल की कीमतें? जानें इसके प्रभाव

कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित संकट के कारण हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह जलडमरूमध्य बंद होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी कमी आ सकती है। एशियाई देशों, विशेषकर भारत, पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि वे इस मार्ग पर निर्भर हैं। जानें इस स्थिति का विस्तृत विश्लेषण और इसके संभावित परिणाम।
 

तेल की कीमतों में तेजी का कारण


नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं। इस अचानक वृद्धि ने विशेषज्ञों और व्यापारियों के बीच चिंता का माहौल बना दिया है, क्योंकि इसे 1970 के दशक के प्रमुख तेल संकटों से जोड़ा जा रहा है। इस चिंता का मुख्य कारण मध्य पूर्व में स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।


वैश्विक तेल आपूर्ति पर प्रभाव

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, इस संकरे समुद्री मार्ग से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं। यह मात्रा वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत और समुद्री तेल व्यापार का एक चौथाई से अधिक है। इसका मतलब है कि हर पांच में से एक बैरल तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए, यदि यहां कोई व्यवधान आता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ेगा।


एशियाई देशों पर प्रभाव

एशियाई देशों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर


होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला तेल मुख्य रूप से एशियाई देशों तक पहुंचता है। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े आयातक इस मार्ग पर निर्भर हैं। अनुमान है कि इन चार देशों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कुल कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। यदि यहां लंबे समय तक रुकावट आती है, तो इसका सबसे बड़ा असर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिल सकता है।


तेल आपूर्ति संकट का खतरा

तेल आपूर्ति संकट का खतरा


एक बाजार रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद हो जाता है, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट उत्पन्न कर सकता है। अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।


क्या पूरी तरह रुक सकती है आपूर्ति?

क्या पूरी तरह रुक सकती है आपूर्ति?


हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति का रुकना सबसे खराब स्थिति का अनुमान है। वास्तव में, पूरी तरह से तेल का प्रवाह रुकना आसान नहीं है। कुछ टैंकरों का आवागमन जारी रह सकता है। इसके अलावा, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों के पास ऐसे पाइपलाइन मार्ग हैं, जिनसे तेल को जलडमरूमध्य को पार किए बिना दूसरे बंदरगाहों तक पहुंचाया जा सकता है। कई देशों के पास रणनीतिक तेल भंडार भी हैं, जिनका उपयोग आपात स्थिति में किया जा सकता है।


भारत के लिए चिंता का विषय

भारत के लिए क्यों चिंता की बात


भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसलिए, वैश्विक बाजार में कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। भारतीय रिजर्व बैंक के अध्ययन के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की वृद्धि से महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक वृद्धि पर भी असर पड़ सकता है।


कीमतों में वृद्धि का प्रभाव

कीमतों में तेजी का असर


यदि तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी थोड़े समय के लिए है, तो स्थिति संभाली जा सकती है। लेकिन अगर कीमतें लगातार 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ती रहती हैं, तो इसका असर महंगाई, सरकारी खर्च और वित्तीय बाजारों पर भी पड़ेगा। असल समस्या यह है कि दुनिया की तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा एक संकरे समुद्री मार्ग पर निर्भर है। यदि यह मार्ग लंबे समय के लिए बाधित हो जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।