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क्या होर्मुज स्ट्रेट पर स्थिति सामान्य हुई? जानें क्या कहता है ताजा डेटा

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस मार्ग से 20% कच्चा तेल और एलएनजी का परिवहन होता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, जहाजों की आवाजाही में सुधार हो रहा है, लेकिन युद्ध पूर्व की स्थिति में लौटने में समय लग रहा है। सुरक्षा चिंताओं और भौगोलिक संवेदनशीलता के कारण स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है। जानें इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं।
 

नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट पर नजरें


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त होने के बाद, पूरी दुनिया की निगाहें होर्मुज स्ट्रेट पर हैं। इस समुद्री मार्ग से लगभग 20% कच्चा तेल और एलएनजी का परिवहन होता है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या यहां की स्थिति पूरी तरह से सामान्य हो गई है?


युद्ध पूर्व की स्थिति में नहीं लौटे

समुद्री ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट से केवल 34 वाणिज्यिक जहाज गुजरे। यह संख्या पहले से बेहतर है, लेकिन युद्ध से पहले यहां प्रतिदिन औसतन 100 जहाजों का आवागमन होता था। इसका मतलब है कि ट्रैफिक में सुधार हो रहा है, लेकिन अभी भी पूरी गति नहीं आई है।


युद्ध के दौरान स्थिति बहुत गंभीर थी। 1 मार्च से 17 जून के बीच, तनाव के कारण केवल 13 जहाज प्रतिदिन गुजर रहे थे। कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने मार्ग बदल दिए थे, जबकि कुछ ने अपनी सेवाएं पूरी तरह से रोक दी थीं।


ट्रैफिक सामान्य होने में देरी

17 जून को हुए समझौते के बाद, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर सहमति बनी थी। वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू करने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद जहाज लौटे हैं, लेकिन शिपिंग कंपनियां अब भी पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं।


सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता का विषय है। जॉइंट मैरिटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर ने स्पष्ट किया है कि यहां कई समुद्री खतरें मौजूद हैं। कुछ क्षेत्रों में बारूदी सुरंगें अब भी हैं, जिन्हें हटाने का कार्य जारी है। ऐसे में जहाजों को अधिक सतर्क रहना पड़ रहा है।


संवेदनशील भौगोलिक स्थिति

होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति इसे अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। इसका सबसे संकरा हिस्सा केवल 24 मील चौड़ा है, जिसमें एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ ओमान है। इतनी कम जगह होने के कारण जहाजों के पास खतरे से बचने के विकल्प सीमित होते हैं। यही कारण है कि कोई भी सैन्य तनाव सबसे पहले इसी मार्ग को प्रभावित करता है।


ईरान का तेल निर्यात बढ़ा

समझौते के अनुसार, अमेरिका को 19 जुलाई तक ईरानी बंदरगाहों से नौसैनिक नाकेबंदी हटानी है। ईरान ने भी युद्ध से पहले के स्तर तक जहाजों की आवाजाही को बढ़ाने का वादा किया है। पाबंदी हटने के बाद, ईरान लगभग 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल बेच चुका है। हालांकि, खाड़ी के अन्य देशों को अभी भी सामान्य निर्यात में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।


किसका होगा नियंत्रण?

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अब भी अनसुलझा है कि होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण किसका होगा। मौजूदा समझौते में इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। फिलहाल, 60 दिनों तक जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन बाद में ईरान शुल्क लगाने की योजना बना सकता है। इसलिए, युद्ध रुकने के बावजूद यह मार्ग पूरी तरह से सुरक्षित और सामान्य नहीं माना जा रहा है।