क्या होर्मुज स्ट्रेट में डूबा जहाज वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित करेगा?
नई दिल्ली में हुई घटना
नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट में एक मालवाहक जहाज, जो UAE के स्वामित्व में था, डूब गया। इस घटना के बाद समुद्र में iPhone और महंगे परफ्यूम की बोतलें तैरती हुई दिखाई दीं। एक वीडियो में लोग छोटी नावों पर सवार होकर समुद्र में बिखरे सामान को इकट्ठा करते हुए नजर आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सिंगापुर के झंडे वाला कंटेनर जहाज GFS Pride बुधवार को इस हादसे का शिकार हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, जहाज एक समुद्री माइन से टकराने के कारण डूबा, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में आग लगने और अज्ञात प्रोजेक्टाइल के हमले का भी जिक्र किया गया है।
सभी क्रू मेंबर्स सुरक्षित
सभी 21 क्रू मेंबर्स सुरक्षित
समुद्री अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जहाज पर सवार सभी 21 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया है और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। यह जहाज दुबई से लगभग 2,500 कंटेनर लेकर निकला था, जिनमें बड़ी संख्या में iPhone और महंगे परफ्यूम शामिल थे। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि जहाज समुद्री बारूदी सुरंग से टकराया था, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री अधिकारियों का कहना है कि जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ था।
तनाव का बढ़ता स्तर
दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते पर बढ़ा तनाव
यह घटना उस समय हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट में पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और LNG सप्लाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। लगभग पांचवां हिस्सा वैश्विक तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरता है, जिससे यहां होने वाली कोई भी घटना अंतरराष्ट्रीय बाजार को प्रभावित कर सकती है। इससे पहले 23 सितंबर को एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाला मालवाहक जहाज Cape Dao भी इसी क्षेत्र में प्रोजेक्टाइल की चपेट में आकर डूब गया था, जिसमें एक क्रू मेंबर की मौत हो गई थी।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव
ईरान-अमेरिका टकराव का असर
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अपने बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी और सख्त प्रतिबंधों के जवाब में ऐसी कार्रवाइयाँ कर रहा है। रॉयटर्स ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि तेहरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण बढ़ाकर तेल की कीमतें ऊंची रखना चाहता है और 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर दबाव डालना चाहता है। इस स्थिति से वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।