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क्या होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते अमेरिकी युद्धपोतों का ईरान पर असर होगा?

पश्चिम एशिया के होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसेना की बढ़ती तैनाती ने क्षेत्र में तनाव को बढ़ा दिया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकेबंदी को सख्त करने के लिए 20 से अधिक युद्धपोत तैनात किए हैं। इस बीच, ईरान और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता अंतिम चरण में है, जबकि ईरान ने अमेरिका से कई मांगें रखी हैं। जानें इस जटिल स्थिति का क्या असर होगा और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका प्रभाव कैसे पड़ेगा।
 

नई दिल्ली में बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ


नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट, जो पश्चिम एशिया के प्रमुख समुद्री मार्गों में से एक है, के आसपास अमेरिकी सैन्य गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। अमेरिकी सेंट्रिन कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उसने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकेबंदी को सख्त करने के लिए 20 से अधिक युद्धपोतों को क्षेत्र में तैनात किया है। इनमें अमेरिकी नौसेना का विध्वंसक यूएसएस रॉस भी शामिल है।


सैन्य तैनाती और आंकड़े

अमेरिकी कमान ने अपनी सैन्य तैनाती को मजबूत करने के साथ-साथ हालिया अभियानों के आंकड़े भी साझा किए हैं। 9 अगस्त तक, सेंटकॉम ने 55 वाणिज्यिक जहाजों को अन्य मार्गों पर मोड़ने का कार्य किया है, जबकि दो जहाजों को निष्क्रिय किया गया है और नियमों के पालन के लिए दो जहाजों की जांच की गई है।


राजनयिक वार्ता के बीच अमेरिकी दबाव

राजनयिक वार्ता के बीच बढ़ा अमेरिकी दबाव


अमेरिकी नौसेना की यह कड़ी नाकेबंदी उस समय सामने आई है, जब ईरान और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। तेहरान और मस्कट के बीच चल रही इस बातचीत का उद्देश्य जलसंधि के माध्यम से नई और सुरक्षित शिपिंग लेन स्थापित करना है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को पुष्टि करते हुए कहा कि ओमान के साथ मसौदा लगभग तय है।


ईरान की मांगें और अमेरिकी प्रतिक्रिया

शर्तों के चक्रव्यूह में उलझा समुद्री व्यापार


जलमार्ग से प्रतिबंध हटाने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने कई मांगें रखी हैं। ईरान की शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाकर जोलकादर के अनुसार, वाशिंगटन को अपनी सैन्य धमकियां पूरी तरह बंद करनी होंगी, प्रतिबंध हटाने होंगे और क्षेत्र में ईरानी सहयोगियों पर हमले रोकने होंगे। इसके साथ ही तेहरान ने अमेरिकी हमलों से हुए नुकसान के मुआवजे और अमेरिका में फ्रीज की गई अपनी संपत्तियों को बहाल करने की शर्त रखी है।


अमेरिका का स्पष्ट संदेश

अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सख्त सैन्य कार्रवाइयों का एकमात्र मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और क्षेत्र में उसकी सैन्य आक्रामकता को नियंत्रित करना है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर ईरान वाणिज्यिक जहाजों के निर्बाध आवागमन पर सहमति जताता है, तभी अमेरिकी नाकेबंदी में ढील दी जाएगी।


युद्धविराम के टूटने से गहराया संकट

युद्धविराम के टूटने से गहराया संकट


जून में दोनों देशों के बीच बने एक अस्थाई युद्धविराम के बाद जुलाई में अमेरिका ने फिर से ईरानी जहाजों पर बंदिशें लागू कर दी थीं, जिसे तेहरान ने शांति समझौते का सीधा उल्लंघन करार दिया। वर्तमान में वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत का कोई जरिया नहीं है और सारा संदेश-व्यवहार मध्यस्थों के माध्यम से ही चल रहा है। एक तरफ जहां मध्यस्थ देश समझौते का रास्ता तलाश रहे हैं, वहीं समुद्र में अमेरिकी युद्धपोतों की यह मौजूदगी पूरे वैश्विक ऊर्जा बाजार और शिपिंग मार्गों के लिए भारी अनिश्चितता पैदा कर रही है।