खाड़ी देशों में पानी का संकट: ईरान-इजरायल युद्ध का बढ़ता खतरा
नई दिल्ली में जल संकट की चेतावनी
नई दिल्ली : ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने खाड़ी क्षेत्र में एक गंभीर जल संकट उत्पन्न कर दिया है। तेल और गैस के अलावा, अब पानी भी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। खाड़ी देशों की जनसंख्या पीने के पानी के लिए डीसैलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर है, जो अब मिसाइल और ड्रोन हमलों का लक्ष्य बन रहे हैं। हाल ही में, बहरीन ने अपने एक प्लांट पर ईरान के हमले का आरोप लगाया है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
डीसैलिनेशन प्लांट्स की सुरक्षा पर खतरा
पर्शियन गल्फ के तटों पर कई डीसैलिनेशन प्लांट समुद्री जल को पीने योग्य बनाने का कार्य करते हैं। ये प्लांट कुवैत, ओमान और सऊदी अरब जैसे देशों की जल आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं। कुवैत में 90%, ओमान में 86% और सऊदी अरब में 70% पानी इनसे प्राप्त होता है। यदि इन प्लांट्स को नुकसान पहुंचा, तो बड़े शहरों में पानी की भारी कमी हो सकती है।
युद्ध के दौरान डीसैलिनेशन प्लांट्स पर हमले
28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध में कई महत्वपूर्ण ढांचों पर हमले हुए हैं। 2 मार्च को ईरान ने दुबई के जेबेल अली बंदरगाह को निशाना बनाया, जो दुनिया के सबसे बड़े डीसैलिनेशन प्लांट से केवल 12 मील की दूरी पर है। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह और कुवैत के दोहा वेस्ट प्लांट के पास भी नुकसान की खबरें आई हैं, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये हमले जानबूझकर किए गए थे या नहीं।
सिस्टम में गड़बड़ी का प्रभाव
कई डीसैलिनेशन प्लांट्स पावर प्लांट्स से जुड़े हुए हैं। यदि बिजली की आपूर्ति बाधित होती है, तो पानी का उत्पादन भी रुक सकता है। विशेषज्ञ एड कुलिनेन के अनुसार, इन प्लांट्स के इनटेक सिस्टम, ट्रीटमेंट फैसिलिटी या एनर्जी सप्लाई में छोटी सी गड़बड़ी भी पूरे सिस्टम को ठप कर सकती है। ऐसे में खाड़ी देश युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
खाड़ी देशों की जल निर्भरता
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने बैकअप सिस्टम और पाइपलाइनों में निवेश किया है, लेकिन बहरीन, कतर और कुवैत जैसे छोटे देशों के पास सीमित विकल्प हैं। एक पुराने अमेरिकी दस्तावेज के अनुसार, यदि सऊदी अरब के जुबैल प्लांट को नुकसान पहुंचता है, तो रियाद को एक हफ्ते में खाली करना पड़ सकता है। यह स्थिति पानी के संकट की गंभीरता को दर्शाती है।
ईरान की जल चुनौतियाँ
ईरान डीसैलिनेशन पर कम निर्भर है और नदियों, बांधों और भूजल से पानी प्राप्त करता है। लेकिन लंबे सूखे ने तेहरान के जलाशयों को खतरनाक स्तर तक कम कर दिया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो तेहरान को भी खाली करना पड़ सकता है। इससे क्षेत्र में जल संकट और जटिल हो रहा है।