खाड़ी में तनाव: अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान का जवाब
खाड़ी में संघर्ष का नया केंद्र
इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का केंद्र अब खाड़ी के देश नहीं रह गए हैं। असली लड़ाई 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में लड़ी जा रही है। ईरान ने पहले इस जलडमरूमध्य को अमेरिका और इजरायल पर दबाव डालने के लिए बंद किया था, लेकिन अब अमेरिका ने भी इसे बंद करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को इस्लामाबाद में शांति वार्ता के असफल परिणामों के बाद, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब होर्मुज की नाकेबंदी की जाएगी.
अमेरिका की रणनीति
अमेरिका का कहना है कि इस नाकेबंदी का सबसे अधिक प्रभाव ईरान पर पड़ेगा, क्योंकि उसकी आर्थिक स्थिति तेल पर निर्भर है। ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे उसके पास केवल चीन जैसा एक बड़ा आर्थिक साझेदार बचा है। ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि ईरान के व्यापार को समाप्त करना है ताकि वह सरेंडर करे और होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुनिश्चित हो सके.
क्या अमेरिका होर्मुज को पूरी तरह बंद करेगा?
अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। ईरान ने पहले इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखा था और केवल अपने और कुछ मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी थी। अब अमेरिका अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है, जो ईरान के लिए एक बड़ा झटका है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है, और यहां से दुनिया का 20 प्रतिशत पेट्रोलियम गुजरता है। यदि इसे बंद कर दिया गया, तो भारत, चीन, जापान और अन्य एशियाई देशों में ऊर्जा संकट उत्पन्न हो सकता है.
चीन पर प्रभाव
चीन ईरान से गुजरने वाले तेल का लगभग 40 प्रतिशत आयात करता है। चीन ने अन्य देशों से तेल की आपूर्ति के लिए तैयारियां की हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास 1.4 अरब बैरल तेल का भंडार है, जो कई महीनों तक चल सकता है.
भारत पर असर
भारत की ऊर्जा आवश्यकताएं इस रूट पर निर्भर हैं, और देश के कुल आयात का 30 से 40 प्रतिशत इसी मार्ग से आता है। यदि होर्मुज बंद होता है, तो भारत में ऊर्जा संकट और गहरा हो सकता है.
जापान और दक्षिण कोरिया पर प्रभाव
जापान और दक्षिण कोरिया, दोनों ही ऊर्जा की जरूरतों के लिए खाड़ी के देशों पर निर्भर हैं। जापान का लगभग 80 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है, जिससे अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
अन्य देशों पर प्रभाव
सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे देशों को भी इस नाकेबंदी के कारण नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
नाकेबंदी का वर्तमान प्रभाव
ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, और अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ रही हैं। इससे वैश्विक महंगाई का खतरा बढ़ गया है, और खाड़ी के देश अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं कि वह नाकेबंदी को समाप्त करे.