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ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नया रुख: क्या है डेनमार्क के अधिकारों का सच?

अमेरिका का ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर सख्त रुख और डेनमार्क के अधिकारों पर उठाए गए सवालों ने वैश्विक राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ रहा है। इस लेख में हम ग्रीनलैंड के ऐतिहासिक संदर्भ, अमेरिका और डेनमार्क के बीच के पुराने सौदों, और उपनिवेशवाद के प्रभावों पर चर्चा करेंगे। जानें कि यह विवाद कैसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े टकराव का कारण बन सकता है।
 

अमेरिका का ग्रीनलैंड पर सख्त रुख


नई दिल्ली : ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका का दृष्टिकोण अब पहले से कहीं अधिक कठोर और आक्रामक हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस द्वीप को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है और विरोध करने वाले देशों को अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। इस बयान के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। वाशिंगटन का तर्क है कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति और इसके प्राकृतिक संसाधन इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं।


डेनमार्क के अधिकारों पर सवाल

डेनमार्क के अधिकारों पर अमेरिका का सवाल
अमेरिका का कहना है कि ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का अधिकार ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से मजबूत नहीं है। ग्रीनलैंड की भौगोलिक दूरी डेनमार्क से काफी अधिक है, हालांकि यह लंबे समय से डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र रहा है। इतिहास में देखा जाए तो डेनमार्क के लोग ग्रीनलैंड के रास्ते अमेरिका पहुंचे थे और वहां की स्थानीय जनजातियों के साथ संघर्ष किया था। यह घटनाएं लगभग एक हजार साल पुरानी मानी जाती हैं, जिनका उल्लेख आज भी ऐतिहासिक दस्तावेजों में मिलता है।


अमेरिका और डेनमार्क के बीच ऐतिहासिक सौदे

अमेरिका और डेनमार्क के पुराने सौदे की कहानी
ग्रीनलैंड विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य यह है कि लगभग सौ साल पहले अमेरिका ने डेनमार्क से कुछ द्वीप खरीदे थे। उस समय इन द्वीपों को डेनिश वेस्ट इंडीज कहा जाता था, जो बाद में वर्जिन आइलैंड्स के नाम से जाने गए। ये द्वीप कैरेबियाई सागर में स्थित हैं और आज पूरी तरह अमेरिका का हिस्सा हैं। इस क्षेत्र की कुल जनसंख्या लगभग 90 हजार है और इसमें मुख्य रूप से तीन बड़े द्वीप शामिल हैं, जिनके साथ लगभग 40 छोटे द्वीप भी जुड़े हुए हैं।


उपनिवेशवाद का ऐतिहासिक संदर्भ

उपनिवेशवाद और आबादी का ऐतिहासिक पहलू
वर्जिन आइलैंड्स का इतिहास उपनिवेशवाद से गहराई से जुड़ा हुआ है। यूरोपीय शासन के दौरान यहां खेती के लिए अफ्रीका से लोगों को लाया गया था, जिनकी संताने आज भी वहां निवास करती हैं। इससे पहले यह द्वीपसमूह डेनमार्क का उपनिवेश हुआ करता था और उससे पहले यूरोपीय देशों के बीच इन द्वीपों पर कब्जे को लेकर संघर्ष होता रहा। समुद्री लुटेरे भी इन द्वीपों का उपयोग अपने ठिकानों के रूप में करते थे, जिससे यह क्षेत्र लंबे समय तक अस्थिर बना रहा।


ग्रीनलैंड: वैश्विक राजनीति का नया केंद्र

ग्रीनलैंड बना नई वैश्विक टकराव की जमीन
ग्रीनलैंड पर अमेरिका की बढ़ती रुचि ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक राजनीति में रणनीतिक क्षेत्रों का महत्व कितना बढ़ गया है। अमेरिका इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है, जबकि डेनमार्क और उसके समर्थक देश इसे संप्रभुता का मुद्दा मानते हैं। यह विवाद न केवल अमेरिका-यूरोप संबंधों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि भविष्य में यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े टकराव का रूप भी ले सकता है।