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ग्रीनलैंड पर ट्रंप के दावों के बीच यूरोप के देशों की सैन्य तैनाती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मांग के बाद, जर्मनी और फ्रांस ने वहां अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का निर्णय लिया है। स्वीडन, नीदरलैंड और कनाडा भी इस बहुराष्ट्रीय प्रयास में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और आर्कटिक में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए उठाया गया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और ट्रंप के बयानों का क्या असर पड़ा है।
 

यूरोप में हलचल: ग्रीनलैंड पर सैन्य तैनाती


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मांग के बाद, यूरोप और नाटो देशों में हलचल बढ़ गई है। जर्मनी और फ्रांस ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का निर्णय लिया है।


ट्रंप का ग्रीनलैंड पर बयान


स्वीडन, नीदरलैंड और कनाडा भी अपने सैनिकों को ग्रीनलैंड भेजने की योजना बना रहे हैं। यह कदम उस समय उठाया गया है जब ट्रम्प ग्रीनलैंड को अमेरिकी सुरक्षा के लिए आवश्यक मानते हैं। जर्मनी के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि डेनमार्क के अनुरोध पर बुंडेसवेहर का 13 सदस्यीय टोही दल ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक में तैनात किया गया है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और भविष्य में सैन्य सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करना है। जर्मन अधिकारियों का कहना है कि यह तैनाती बहुपक्षीय सहयोग का हिस्सा है, न कि किसी आक्रामक योजना का।


फ्रांस ने भी ग्रीनलैंड में अपने सैनिक भेजने की पुष्टि की है। यूरोपीय संघ की एकमात्र परमाणु शक्ति के रूप में, फ्रांस की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वीडन ने भी अपनी सैन्य भागीदारी की घोषणा की है। स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने बताया कि स्वीडिश सैन्य अधिकारी डेनमार्क के नेतृत्व में होने वाले अभ्यास 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' में भाग लेने के लिए ग्रीनलैंड पहुंचे हैं।


नीदरलैंड और कनाडा के सैनिकों के भी इस बहुराष्ट्रीय प्रयास में शामिल होने की संभावना है। सभी देशों का कहना है कि उनकी तैनाती का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और आर्कटिक में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना है।


इस बीच, ट्रम्प ने बार-बार कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की मिसाइल रक्षा प्रणाली और आर्कटिक में रूस और चीन के प्रभाव को रोकने के लिए आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया, तो कोई अन्य महाशक्ति ऐसा कर सकती है, जो 'अस्वीकार्य' होगा।


डेनमार्क ने ट्रम्प के दावों को खारिज किया


हालांकि, डेनमार्क ने ट्रम्प के बयानों को सिरे से खारिज कर दिया है। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड पर किसी प्रकार का कब्जा न तो आवश्यक है और न ही स्वीकार्य। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने भी कहा कि यदि कभी अमेरिका और डेनमार्क में से किसी एक को चुनने की स्थिति आई, तो ग्रीनलैंड डेनमार्क के साथ खड़ा होगा।


वर्तमान में, ग्रीनलैंड डेनमार्क की संप्रभुता के अंतर्गत एक स्वायत्त क्षेत्र है, जहां अपनी संसद और सरकार है, जबकि रक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी कोपेनहेगन के पास है। इस घटनाक्रम ने आर्कटिक को एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।