ग्रीनलैंड में बढ़ी सतर्कता: डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का असर
ग्रीनलैंड में सुरक्षा के उपायों की शुरुआत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टिप्पणियों के चलते ग्रीनलैंड में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। वहां की सरकार ने संभावित खतरों के मद्देनजर एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहें।
प्रधानमंत्री नीलसन की चेतावनी
उन्होंने कहा कि सैन्य हमले की संभावना बहुत कम है, लेकिन इसे पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नीलसन ने मंगलवार को कहा कि वर्तमान में किसी सैन्य संघर्ष के संकेत नहीं हैं, फिर भी वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सतर्क रहना आवश्यक है। उनका उद्देश्य लोगों में भय पैदा करना नहीं, बल्कि उन्हें अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक और व्यावहारिक रूप से तैयार करना है।
विशेष टास्क फोर्स का गठन
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ग्रीनलैंड प्रशासन सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर एक विशेष टास्क फोर्स बनाने की योजना बना रहा है। यह टास्क फोर्स रोजमर्रा की जिंदगी में संभावित बाधाओं से निपटने की रणनीति तैयार करेगी। नागरिकों को सलाह दी जा सकती है कि वे कम से कम पांच दिनों के लिए भोजन, पानी और आवश्यक सामान अपने घरों में रखें, ताकि आपात स्थिति में कोई कठिनाई न हो।
ट्रंप के विवादास्पद बयान
यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों से जुड़ा हुआ है। ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इसे अमेरिकी नियंत्रण में होना चाहिए। हाल ही में उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक एआई द्वारा बनाई गई तस्वीर साझा की, जिसमें वह ग्रीनलैंड की ज़मीन पर अमेरिकी झंडा लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया
डेनमार्क, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे कई यूरोपीय देशों ने ट्रंप के रुख का विरोध किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो देश इस मुद्दे पर अमेरिका का समर्थन नहीं करेंगे, उन्हें व्यापारिक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति ने ग्रीनलैंड और पूरे यूरोप में चिंता बढ़ा दी है।