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चीन का ईरान और लेबनान के लिए नई मानवीय सहायता का ऐलान, क्या है इसके पीछे की रणनीति?

चीन ने ईरान और लेबनान के लिए नई मानवीय सहायता की घोषणा की है, जो मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों के बीच महत्वपूर्ण है। बीजिंग का कहना है कि वह युद्ध से प्रभावित लोगों की मदद करेगा और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए प्रयासरत है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही शांति प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। जानें इस स्थिति का क्षेत्रीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
 

चीन की नई सहायता पहल


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों और मानवीय संकट के बीच, चीन ने ईरान और लेबनान के लिए नई सहायता भेजने की योजना बनाई है। बीजिंग ने कहा है कि वह युद्ध और अस्थिरता से प्रभावित लोगों की मदद के लिए जल्द ही राहत सामग्री और अन्य मानवीय सहायता प्रदान करेगा। इसके साथ ही, चीन ने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए अपने कूटनीतिक प्रयासों को और मजबूत करने का भी आश्वासन दिया है।


चीनी विदेश मंत्रालय का बयान

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का बयान


बुधवार को एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन निकट भविष्य में ईरान और लेबनान के पुनर्वास और पुनर्निर्माण में सहायता के लिए नई राहत सामग्री भेजेगा। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से प्रभावित नागरिकों को राहत पहुंचाना वैश्विक समुदाय की जिम्मेदारी है, और चीन इस दिशा में लगातार योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने सहायता की मात्रा या स्वरूप के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।


पिछले प्रयासों का संदर्भ

चीनी अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब बीजिंग ने संघर्षग्रस्त देशों की मदद का निर्णय लिया है। इससे पहले भी, चीन ने कई देशों को आपातकालीन राहत सामग्री और वित्तीय सहायता प्रदान की है। मार्च 2026 में, चीन ने ईरान सहित विभिन्न प्रभावित देशों के लिए एक विशेष मानवीय सहायता पैकेज जारी किया था।


इस बीच, चीन ने उस हमले के पीड़ितों के लिए भी आर्थिक सहायता की घोषणा की थी, जिसमें ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय को निशाना बनाया गया था। इस घटना में कई बच्चों और नागरिकों की जान चली गई थी, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और निंदा हुई थी।


चीन की स्थायी शांति की दिशा में पहल

चीन ने स्पष्ट किया है कि वह केवल राहत सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। विदेश मंत्रालय का कहना है कि बातचीत और कूटनीति ही ऐसे संघर्षों का स्थायी समाधान निकाल सकती है।


अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी

डोनाल्ड ट्रंप का बयान


इस बीच, G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही शांति प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सिसी से मुलाकात के दौरान, ट्रंप ने कहा कि मौजूदा समझौता अभी अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रस्तावित समझौते की शर्तें अमेरिका के हितों के अनुरूप नहीं रहीं, तो सैन्य विकल्प पर फिर से विचार किया जा सकता है।


ट्रंप के इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के बीच औपचारिक शांति समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं।