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चीन का जासूसी सैटेलाइट याओगन-50 हुआ तबाह, अमेरिका ने उठाए सवाल

चीन का नवीनतम जासूसी सैटेलाइट याओगन-50 रहस्यमय तरीके से नष्ट हो गया है, जिससे अंतरिक्ष में खतरनाक मलबे के टुकड़े बिखर गए हैं। अमेरिका ने इस घटना को ईरान के घातक बैलिस्टिक मिसाइल हमले से जोड़ा है, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिकों की जान गई थी। इस खुलासे ने अमेरिका और चीन के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। क्या अमेरिका ने जानबूझकर इस सैटेलाइट को निशाना बनाया? जानें इस जटिल स्थिति के बारे में।
 

चीन के जासूसी सैटेलाइट का रहस्यमय विनाश

चीन के नवीनतम सैन्य जासूसी उपग्रह याओगन-50 (02) को एक बड़ा झटका लगा है, जब यह मार्च 2026 में लॉन्च होने के बाद रहस्यमय तरीके से नष्ट हो गया। यह उपग्रह एक असामान्य रेट्रोग्रेड कक्षा में चक्कर लगा रहा था और मात्र डेढ़ महीने में ही टुकड़ों में बिखर गया। अमेरिकी स्पेस फोर्स की ट्रैकिंग प्रणाली के अनुसार, इस घटना के बाद अंतरिक्ष में कम से कम 43 खतरनाक मलबे के टुकड़े मौजूद हैं। ये टुकड़े पृथ्वी से 600 से 1,100 किलोमीटर की ऊंचाई पर फैले हुए हैं, जहां वायुमंडलीय खिंचाव की कमी के कारण यह मलबा कई दशकों तक अन्य उपग्रहों के लिए खतरा बना रहेगा। सैटेलाइट के नष्ट होने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑनबोर्ड प्रोपल्शन सिस्टम में विस्फोट, बैटरी फेलियर या बाहरी अंतरिक्षीय कचरे से टकराने के कारण हो सकता है। बीजिंग ने इस नुकसान पर चुप्पी साध रखी है, जबकि चीनी स्पेस रडार ने मलबे के कुछ हिस्सों की पुष्टि की है।


ईरान के हमले से जुड़ी चीनी सैटेलाइट तस्वीरें

अमेरिकी सरकार ने चीनी कंपनियों द्वारा प्रदान की गई उच्च गुणवत्ता वाली सैटेलाइट तस्वीरों को ईरान के घातक बैलिस्टिक मिसाइल हमले से जोड़ा है, जिसमें जुलाई में जॉर्डन के एक सैन्य बेस पर तीन अमेरिकी सैनिकों की जान गई थी। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी तब सामने आई जब ट्रंप प्रशासन ने महीनों तक बीजिंग को चेतावनी दी थी कि चीनी कंपनियाँ तेहरान को डेटा सप्लाई कर रही हैं। हालांकि अमेरिका ने चीन पर सीधे तौर पर आरोप नहीं लगाया है, लेकिन इस खुलासे से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच तनाव बढ़ सकता है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि जब उन्होंने 17 जुलाई के हमले से संबंधित तस्वीरों के बारे में चीनी अधिकारियों से सवाल किया, तो उन्होंने सबूत की मांग की।


बीजिंग का रुख

चीन के दूतावास ने स्पष्ट किया है कि बीजिंग द्वारा तेहरान को दी गई सहायता अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप है। आलोचकों का कहना है कि यह टकराव दूसरे देशों को बुरी नीयत से इसमें घसीटने का प्रयास है। 17 जुलाई को ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों के ठिकाने को निशाना बनाया, जिसमें तीन सैनिक मारे गए और चार अन्य घायल हुए। इस हमले ने अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं को बढ़ा दिया है।


क्या अमेरिका ने किया निशाना?

दोनों घटनाओं का समय एक-दूसरे से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। पहले चीनी इमेजरी का उपयोग अमेरिकी बेस पर हमले में किया गया और फिर उसी श्रेणी का एक चीनी टोही सैटेलाइट नष्ट हो गया। हालांकि, कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि अमेरिका ने इसे निशाना बनाया या नहीं।