चीन की ताइवान पर बढ़ती नजरें: अमेरिका-ईरान संघर्ष का फायदा उठाने की कोशिश
चीन की सैन्य गतिविधियों में तेजी
अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से चल रहे संघर्ष ने वैश्विक स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया है। इस स्थिति का सबसे बड़ा लाभ चीन उठा रहा है, जिससे ताइवान अब एकाकी महसूस कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ताइवान पर हमले की तैयारी कर चुका है।
ताइवान के आस-पास की गतिविधियाँ
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को जानकारी दी कि चीन के 19 सैन्य विमान, 9 नौसैनिक जहाज और 2 सरकारी जहाज ताइवान के आसपास सक्रिय पाए गए। इनमें से 13 लड़ाकू विमान ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा पार कर उसके एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में घुस आए।
चीन की सैन्य गतिविधियों में वृद्धि
चीन ने इससे पहले भी 13 सैन्य विमान तैनात किए थे, जिनमें से 11 ने मध्य रेखा पार की थी। ये सभी विमान संयुक्त हवाई और समुद्री अभ्यास का हिस्सा थे। ताइवान की सेना ने इन गतिविधियों पर ध्यान रखा और आवश्यक जवाबी तैयारी की। यह सब कुछ उस समय हो रहा है जब मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस स्थिति का लाभ उठाकर ताइवान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
चीन-ताइवान विवाद का इतिहास
चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को स्वतंत्र देश के रूप में देखता है। यही विवाद दोनों के बीच टकराव का मुख्य कारण है। चीन ने बार-बार संकेत दिया है कि वह ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए सैन्य विकल्प का सहारा ले सकता है।
ईरान मुद्दे पर चीन का दृष्टिकोण
दिलचस्प बात यह है कि चीन के ईरान के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन अमेरिकी हमलों के बावजूद चीन का रुख शांत रहा है। उसने केवल बयानबाजी तक सीमित रहकर ईरान को कोई ठोस सैन्य सहायता नहीं दी। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की प्राथमिकता फिलहाल ताइवान है।
शी जिनपिंग का स्पष्ट संदेश
रिपोर्टों के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ बातचीत में ताइवान को सबसे बड़ा मुद्दा बताया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है और इस पर किसी भी बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीन वर्तमान में सीधे टकराव से बचते हुए 'प्रेशर बिल्ड-अप' की रणनीति पर काम कर रहा है।