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चीन के मिसाइल परीक्षण से वैश्विक राजनीति में हलचल: अमेरिका की चिंता बढ़ी

चीन द्वारा प्रशांत महासागर में किए गए परमाणु-सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिका ने इस पर गहरी चिंता जताई है और बीजिंग से अपील की है कि वह परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए सार्थक वार्ताओं में शामिल हो। चीन ने इसे एक नियमित सैन्य अभ्यास बताया है, जबकि अमेरिका ने पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए हैं। जानिए इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

चीन का मिसाइल परीक्षण और अमेरिका की प्रतिक्रिया


नई दिल्ली: हाल ही में चीन द्वारा प्रशांत महासागर में किए गए परमाणु-सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस घटना पर अमेरिका ने गहरी चिंता व्यक्त की है और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। अमेरिका ने बीजिंग से आग्रह किया है कि वह परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी नियंत्रण वार्ताओं में शामिल हो।


विवाद की शुरुआत

यह विवाद तब शुरू हुआ जब चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना ने सोमवार को प्रशांत महासागर में एक परमाणु-संचालित पनडुब्बी से डमी वॉरहेड के साथ लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। चीनी रक्षा मंत्रालय ने इसे एक नियमित अभ्यास का हिस्सा बताया है।


अमेरिका की पारदर्शिता पर चिंता

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक बयान में कहा कि अमेरिका ने प्रशांत महासागर के दक्षिणी हिस्से में चीनी पनडुब्बी से दागी गई निशस्त्र अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण की बारीकी से निगरानी की है। उन्होंने बीजिंग की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जबकि पूरी दुनिया परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए प्रयासरत है, चीन इसके विपरीत कदम उठा रहा है। पिगॉट ने चीन के सैन्य विस्तार को 'अपारदर्शी' करार दिया और कहा कि यह वैश्विक शांति के लिए चिंता का विषय है।


सुरक्षा परिषद के नियमों की याद दिलाना

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के बीच हुए समझौतों का हवाला देते हुए चीन को उसके दायित्वों की याद दिलाई। वॉशिंगटन ने मांग की है कि चीन सभी प्रकार के अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल और अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की नियमित जानकारी साझा करे, जैसा कि अन्य P5 देश करते हैं।


चीन का बचाव

चीन ने अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं को खारिज करते हुए अपने इस कदम का बचाव किया है। चीनी नौसेना के अनुसार, यह प्रक्षेपण उनके वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक सामान्य हिस्सा था। बीजिंग का कहना है कि यह परीक्षण पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप था और इसका उद्देश्य किसी विशेष देश को निशाना बनाना नहीं था। चीन ने यह भी कहा कि संबंधित देशों को इस लॉन्चिंग के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था, हालांकि उन्होंने मिसाइल के नाम या उसकी मारक क्षमता का खुलासा नहीं किया है।