चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा: BRICS शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय वार्ता की तैयारी
शी जिनपिंग का भारत दौरा
नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। उनके नई दिल्ली पहुंचने से पहले, बीजिंग ने भारत-चीन संबंधों पर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। चीन ने कहा है कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को सही तरीके से संभालते हुए अच्छे पड़ोसी और मित्र की तरह आगे बढ़ना चाहिए।
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने बताया कि दोनों देशों के नेता द्विपक्षीय बैठक की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। इसके लिए बातचीत बढ़ाने और आपसी सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता है। चीन ने यह भी कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे के विकास में सहयोगी बनकर आगे बढ़ना चाहिए।
चीन का मतभेदों पर दृष्टिकोण
चीन ने मतभेदों को लेकर क्या कहा?
शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि चीन दोनों नेताओं की रणनीतिक सोच के अनुरूप भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है। उन्होंने बातचीत को रिश्तों का एक महत्वपूर्ण आधार बताया और कहा कि दोनों देशों को आपसी संवाद बढ़ाने के साथ-साथ सहयोग के नए रास्ते खोजने चाहिए। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं।
China and India are arranging for the bilateral meeting between President Xi and Prime Minister Modi.
— Xu Feihong (@China_Amb_India) September 11, 2026
This will be the third year in a row for the two leaders to meet with each other, following their meetings in Kazan and Tianjin.
China will work with India to act on the… pic.twitter.com/jD3GeZpjZk
बीजिंग का कहना है कि असहमति के बावजूद बातचीत का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए। दोनों देशों को समस्याओं को उचित तरीके से संभालते हुए व्यापक और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहिए।
विदेश मंत्रालय का संदेश
विदेश मंत्रालय ने भी दिया यही संदेश
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी भारत के साथ संबंधों को लेकर इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा कि चीन नई दिल्ली के साथ बातचीत और संपर्क बढ़ाने के लिए तैयार है। उनके अनुसार, दोनों देशों को अपने रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
माओ निंग ने भी मतभेदों को सही तरीके से संभालने की आवश्यकता बताई। उन्होंने भारत और चीन को अच्छे पड़ोसी बताते हुए कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाले साझेदार बन सकते हैं।
जिनपिंग का भारत दौरा
सात साल बाद भारत आ रहे हैं जिनपिंग
शी जिनपिंग शनिवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। वह 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं। इस दौरान उनकी पीएम नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। यह दौरा करीब सात साल बाद हो रहा है, इससे पहले वह 2019 में महाबलीपुरम में मोदी के साथ अनौपचारिक बैठक के लिए आए थे। यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के रिश्तों में सीमा समेत कई मुद्दों पर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। हालाँकि, हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिशें भी हुई हैं।
BRICS शिखर सम्मेलन में सहयोग
BRICS में भी रिश्तों पर रहेगी नजर
जिनपिंग का भारत दौरा केवल मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक तक सीमित नहीं रहेगा। वह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है।
चीन ने ब्रिक्स के स्तर पर भी संवाद और सहयोग बढ़ाने की बात कही है। माओ निंग के अनुसार, बीजिंग ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में काम करना चाहता है। उनके मुताबिक, ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
जिनपिंग के भारत रवाना होने से पहले चीन के इन बयानों ने मोदी-जिनपिंग बैठक को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा, द्विपक्षीय संबंध और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर क्या रुख सामने आता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।