चीन ने भारत की सीमा पर तैनात किए J20 फाइटर जेट, सेटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा
चीन ने भारत की सीमा पर अपने अत्याधुनिक J20 फाइटर जेट्स की तैनाती की है, जो सेटेलाइट तस्वीरों से स्पष्ट हुआ है। यह तैनाती शिनजियांग और तिब्बत के एयरबेस पर की गई है, जिससे भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सैन्य रणनीति ताइवान की दिशा में केंद्रित है, लेकिन भारत की सीमा पर भी उनकी गतिविधियाँ बढ़ रही हैं। जानें इस स्थिति का क्या प्रभाव पड़ सकता है और भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी।
Jul 28, 2026, 13:18 IST
चीन की नई सैन्य तैनाती
चीन ने भारत के साथ अपनी सीमा पर अपने अत्याधुनिक फाइटर जेट्स को तैनात किया है, जिसका खुलासा सेटेलाइट तस्वीरों से हुआ है। इन तस्वीरों से यह स्पष्ट हुआ है कि चीन ने अपने दो एयरबेस पर 11 J20 फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। J20, जिसे 'माइटी ड्रैगन' के नाम से भी जाना जाता है, रडार से बचने की क्षमता और उन्नत एआईएसए रडार से लैस है, जिससे इसकी तैनाती भारत की सीमा पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने जिन दो एयरबेस पर J20 विमानों को तैनात किया है, उनमें पहला शिनजियांग उईगुर ऑटोनॉमस रीजन में स्थित होटन एयरबेस है, जबकि दूसरा तिब्बत के लहस्सा क्षेत्र में डेनस एयरबेस है। होटन एयरबेस पर सात J20 जेट खड़े हुए हैं, जो लेह से 389 किमी उत्तर-पूर्व में और उत्तरी लद्दाख में भारतीय वायुसेना के दौलत बैग ओल्डी एयर फील्ड से 245 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित है।
तिब्बत में J20 की तैनाती
सेटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत के लहासा के पास डमसंग एयरबेस पर चार जेट भी देखे गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने इस साल जून के अंत और जुलाई की शुरुआत में इन एयरबेस पर 11 J-20 जेट तैनात किए थे। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ क्रिस्टोफर क्लेरी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि रिपोर्ट सही है कि चीन हर साल 100 से अधिक ऐसे विमान बना रहा है, तो यह केवल समय की बात है कि भारत की सीमा पर ऐसे विमानों की संख्या बढ़ने लगेगी। जब आपके पास अत्याधुनिक हार्डवेयर हो, तो यह कम महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी पहुंच सकता है।
चीन की सैन्य रणनीति
चीन की वायुसेना जानती है कि उनका असली युद्ध ताइवान की दिशा में होगा, इसलिए उन्होंने अपनी पूर्वी सीमा पर जापान के समुद्र, पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर में अपनी पीएलए एयरफोर्स की तैनाती को मजबूत किया है। उनका ध्यान मुख्य रूप से उस दिशा पर केंद्रित है। भारत के तिब्बत सीमा पर चीनी वायुसेना की तैनाती सीमित होती है। गलवान के समय भी ऐसी ही स्थिति थी। वर्तमान में, भारतीय वायुसेना के पास 29 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, और आवश्यकता पड़ने पर इनमें से अधिकतर को उत्तरी या पूर्वी सीमा पर तैनात किया जा सकता है। हमारे पास S400 भी है, जो एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। हमने S400 का एक स्क्वाड्रन पूर्व में और एक उत्तर में पंजाब में तैनात किया है, जिससे वह चीन की दिशा में भी नजर रख सकता है।