चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रपति जिनपिंग का कठोर कदम
चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा सुनाई है। यह निर्णय न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का प्रतीक है, बल्कि यह सेना और कम्युनिस्ट पार्टी के लिए एक सख्त संदेश भी है। जिनपिंग के करीबी सहयोगियों पर लगे आरोपों ने सत्ता के भीतर चल रही उठापटक को उजागर किया है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और इसके पीछे के राजनीतिक कारण।
May 8, 2026, 20:17 IST
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई
चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा और कठोर कदम उठाया है। हाल ही में, चीन ने अपने दो पूर्व रक्षा मंत्रियों, वे फेंग और ली शंगफों को मौत की सजा सुनाकर दुनिया को चौंका दिया है। यह ध्यान देने योग्य है कि ये दोनों नेता कभी जिनपिंग के करीबी सहयोगी माने जाते थे और चीन की शक्तिशाली सैन्य संस्था सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का हिस्सा रह चुके थे। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के साथ-साथ बेवफाई के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, पूर्व रक्षा मंत्रियों को भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराया गया है। यदि वे अगले दो वर्षों में कोई नया अपराध नहीं करते हैं, तो उनकी सजा को उम्रकैद में बदला जा सकता है।
अदालत का निर्णय और राजनीतिक हलचल
अदालत ने रीफेंग को रिश्वत लेने का दोषी पाया है। आपको बता दें कि दोनों नेताओं को 2024 में चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। चीन में अनुशासन के गंभीर उल्लंघन के लिए अक्सर इस शब्द का उपयोग किया जाता है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे फेंग और ली शंगफू कभी जिनपिंग के विश्वसनीय सहयोगी माने जाते थे। वे फेंग 2018 से 2023 तक चीन के रक्षा मंत्री रहे, और उनके बाद ली शंगफू को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन कुछ महीनों में ही उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग गए। दोनों नेता चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की महत्वपूर्ण रॉकेट फोर्स का नेतृत्व कर चुके हैं, जो चीन की मिसाइल और परमाणु शक्ति की रीढ़ मानी जाती है। इस प्रकार की कार्रवाई को चीन में सत्ता और सेना के बीच चल रही अंदरूनी उठापटक से भी जोड़ा जा रहा है।
सरकारी मीडिया की रिपोर्ट और संभावित साजिश
चीन के सरकारी अखबार पीएलए डेली में इस मामले से संबंधित खुलासे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अखबार ने भ्रष्टाचार के साथ-साथ वफादारी की कमी और विश्वासघात जैसे शब्दों का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने पार्टी के सिद्धांतों से विश्वासघात किया और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति निष्ठा नहीं दिखाई। यह पहली बार है जब किसी आधिकारिक रिपोर्ट में पूर्व रक्षा मंत्रियों के खिलाफ बेवफाई का उल्लेख किया गया है। इसके बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या 2023 में जिनपिंग के खिलाफ सत्ता के भीतर कोई साजिश चल रही थी। हालांकि, चीन सरकार ने इस पर खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन सरकारी मीडिया की भाषा कई सवाल खड़े कर रही है। जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया था, जिसके तहत लाखों अधिकारियों और कई सैन्य जनरलों पर कार्रवाई की गई है। लेकिन पहली बार चीन के रक्षा मंत्रियों को इतनी कठोर सजा दी गई है। यह निर्णय केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि सेना और कम्युनिस्ट पार्टी को यह सख्त संदेश भी है कि जिनपिंग के शासन में वफादारी और अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।