जमात-ए-इस्लामी की गुप्त बैठकों पर प्रतिक्रिया: भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया मोड़
भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव और जमात-ए-इस्लामी की स्थिति
भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के बीच जमात-ए-इस्लामी ने एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। भारतीय अधिकारियों के साथ कथित गुप्त बैठकों की खबरों पर जमात ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने इन रिपोर्टों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में आम चुनाव नजदीक हैं और राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं।
गुप्त बैठक की खबरों पर जमात का स्पष्टीकरण
जमात-ए-इस्लामी ने भारतीय अधिकारियों के साथ गुप्त बैठक की खबरों का सीधे तौर पर खंडन नहीं किया, लेकिन इसे गलत संदर्भ में पेश करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि इस मुलाकात को जानबूझकर 'गुप्त' बताया गया, जबकि यह कोई असामान्य बात नहीं थी। जमात के अनुसार, विभिन्न देशों के राजनयिकों से संवाद करना एक सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है, जिसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
शफीकुर रहमान का बयान
रॉयटर्स को दिए गए एक साक्षात्कार में, जमात के प्रमुख शफीकुर रहमान ने स्वीकार किया कि इस वर्ष उनकी एक भारतीय राजनयिक से मुलाकात हुई थी। उन्होंने बताया कि यह बैठक उनकी बायपास सर्जरी के बाद हुई थी। रहमान के अनुसार, उसी समय अन्य देशों के डिप्लोमैट भी उनसे मिलने आए थे। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अधिकारी ने इस मुलाकात को सार्वजनिक न करने का अनुरोध किया था।
बयान के पीछे की राजनीति
शफीकुर रहमान ने यह सवाल उठाया कि जब अन्य राजनयिकों से हुई मुलाकातों को सार्वजनिक किया गया, तो केवल इस बैठक पर विवाद क्यों उत्पन्न हुआ। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए अंतरराष्ट्रीय संवाद के दरवाजे खुले रखना आवश्यक है। जमात का मानना है कि बातचीत ही संबंधों को सुधारने का एकमात्र उपाय है, न कि चुप्पी या टकराव।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया और रिपोर्ट का प्रभाव
इस मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश में कई राजनीतिक दलों से संपर्क साधा जा रहा है। यह विवाद एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें कहा गया था कि जमात किसी आम सहमति वाली सरकार का हिस्सा बनने के लिए तैयार है।
पाकिस्तान के प्रति जमात का दृष्टिकोण
पाकिस्तान के साथ जमात के संबंधों पर उठते सवालों पर शफीकुर रहमान ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जमात किसी एक देश के पक्ष में नहीं है। पार्टी सभी देशों के साथ संतुलित और सम्मानजनक संबंध चाहती है। उनका जोर इस बात पर था कि राष्ट्रों के बीच संवाद और संतुलन ही स्थायी कूटनीति की नींव है, न कि पक्षपात।