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जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में बारिश का कहर: 35 लोगों की जान गई, 534 सड़कें बंद

इस वर्ष का मानसून उत्तर भारत में कहर बनकर टूटा है, विशेषकर जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में। भारी बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं में 35 लोगों की जान चली गई है। हिमाचल प्रदेश में 534 सड़कें बंद हो गई हैं और 2.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। जानें इस आपदा के कारण क्या स्थिति बनी हुई है और राहत कार्य कैसे चल रहे हैं।
 

जम्मू और हिमाचल में बारिश से तबाही

जम्मू और हिमाचल में बारिश का कहर: इस वर्ष का मानसून उत्तर भारत और पहाड़ी क्षेत्रों में भारी तबाही लेकर आया है। लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। सड़कें और यातायात ठप हो गए हैं, और कई राज्यों में आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश का यह सिलसिला जारी रहेगा, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।


जम्मू-कश्मीर के कटरा में वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिसमें 35 लोगों की जान चली गई। इस घटना ने श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे मैदानी क्षेत्रों में भी बारिश का कहर जारी है।


534 सड़कें बंद, हिमाचल प्रदेश सबसे प्रभावित

मूसलाधार बारिश के कारण 534 सड़कें बंद


हिमाचल प्रदेश इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है। यहां लगातार मूसलाधार बारिश के कारण 534 सड़कें बंद हो गई हैं, और 1,184 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के अनुसार, भूस्खलन, मकानों के ढहने और अचानक आई बाढ़ की घटनाओं में 310 लोगों की जान जा चुकी है। कुल्लू और मंडी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कुल्लू में 166 सड़कें बंद हैं और 600 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं मंडी में 216 सड़कें और 320 ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं। कांगड़ा में पानी की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।


कुल्लू में फंसे हजारों ट्रक

कुल्लू की स्थिति और भी गंभीर है। चंडीगढ़-कुल्लू हाईवे पर भूस्खलन के कारण हजारों ट्रक फंसे हुए हैं, जिनमें सेब, टमाटर और अन्य सब्जियां भरी हुई थीं, जो अब खराब हो रही हैं। छोटे वाहनों को आंशिक रूप से रास्ता दिया गया है, लेकिन भारी वाहनों के फंसने से किसानों और व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।


आर्थिक नुकसान का आकलन

2.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान


हिमाचल सरकार ने अनुमान लगाया है कि बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक संपत्ति को 2.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। इसमें लोक निर्माण विभाग को सड़कों की क्षति से 1.31 लाख करोड़ रुपये, जल शक्ति विभाग को पेयजल और सिंचाई व्यवस्था में 87,226 करोड़ रुपये और बिजली विभाग को ढांचे की मरम्मत पर 13,946 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट जारी किया है। लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा न करें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं, लेकिन लगातार बारिश बचाव टीमों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।