जापान के प्रधानमंत्री का भारत दौरा: व्यापार और रक्षा पर महत्वपूर्ण वार्ता की तैयारी
भारत और जापान के बीच बढ़ती साझेदारी
नई दिल्ली: भारत और जापान के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने के लिए अगले महीने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, जापान के प्रधानमंत्री 1 से 3 जुलाई के बीच भारत का दौरा कर सकते हैं। यदि यह यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है, तो यह मार्च 2022 के बाद दोनों देशों के बीच पहला वार्षिक शिखर सम्मेलन होगा। इसके साथ ही, यह जापानी प्रधानमंत्री की प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली भारत यात्रा भी होगी।
महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर की संभावना
तीन दिवसीय यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष के बीच विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता होने की उम्मीद है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इसके अलावा, जापान-भारत संयुक्त आर्थिक मंच का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि निवेश, व्यापार और कारोबारी सहयोग को बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान
भारत और जापान के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। 2014 में, दोनों देशों ने अपने रिश्तों को विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का दर्जा दिया था। इसके बाद से रक्षा, निवेश, व्यापार, तकनीक, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। इस बार की वार्ता में इन क्षेत्रों को और आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग
सूत्रों के अनुसार, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), बैटरी तकनीक और फार्मास्यूटिकल्स जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही, आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने और निवेश को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा। बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे रणनीतिक मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जा सकते हैं।
हरित ऊर्जा और निजी क्षेत्र के समझौतों पर जोर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरे के दौरान हरित अमोनिया परियोजना, बायोगैस, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऐलान किए जा सकते हैं। इसके अलावा, एआई, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, दवा उद्योग और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में करीब एक दर्जन सरकारी समझौतों और लगभग 120 निजी क्षेत्र के कारोबारी करारों पर भी सहमति बन सकती है। हालांकि, इन सभी संभावित समझौतों और घोषणाओं पर अभी आधिकारिक मुहर लगना बाकी है।