जी7 शिखर सम्मेलन: भारत की भागीदारी और इसके महत्व
जी7 शिखर सम्मेलन का आयोजन
फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में 52वें जी7 शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। हालांकि, भारत इस समूह का आधिकारिक सदस्य नहीं है। जी7 पहले जी8 के नाम से जाना जाता था, लेकिन यूक्रेन युद्ध के चलते रूस को इस समूह से बाहर कर दिया गया।
जी7 का महत्व
जी7 को आज भी विश्व का एक शक्तिशाली समूह माना जाता है। आइए जानते हैं कि जी7 का गठन कब हुआ, इसके सदस्य कौन हैं, इस सम्मेलन में क्या चर्चा होती है, इसकी लागत कितनी होती है और इससे जुड़े विवाद क्या हैं।
जी7 समूह की परिभाषा
जी7 दुनिया की सात प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। 1970 के दशक में वैश्विक महंगाई, तेल संकट और आर्थिक अस्थिरता के कारण 1973 में इस समूह की स्थापना की गई। इसका मुख्य उद्देश्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच वित्तीय और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था। पहला शिखर सम्मेलन 1975 में फ्रांस के रामबौइलेट में आयोजित किया गया। इसके संस्थापक सदस्य जापान, जर्मनी, इटली, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और अमेरिका हैं। 1976 में कनाडा भी इस समूह में शामिल हुआ, जिसके बाद इसे जी7 का नाम दिया गया। यूरोपीय संघ भी 1977 से इस बैठक में भाग लेता है, लेकिन यह औपचारिक सदस्य नहीं है।
जी7 के सदस्य देश
- इटली
- कनाडा
- फ्रांस
- जर्मनी
- जापान
- यूनाइटेड किंगडम
- अमेरिका
जी7 बैठकों में चर्चा
हर साल एक सदस्य देश जी7 शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करता है। इस बार फ्रांस इसकी अध्यक्षता कर रहा है। शिखर सम्मेलन की तैयारी महीनों पहले से शुरू होती है, जिसमें वित्त मंत्री और विदेश मंत्री बैठक करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में जी7 के कार्यक्षेत्र में विस्तार हुआ है, और अब इस मंच पर वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होती है। सुरक्षा, जलवायु, ऊर्जा और व्यापार जैसे विषयों पर बैठकें होती हैं।
जी7 शिखर सम्मेलन की लागत
जी7 शिखर सम्मेलन पर होने वाले खर्च का अनुमान लगाना कठिन है, क्योंकि विभिन्न देशों द्वारा खर्च के आंकड़े भिन्न होते हैं। 2018 में कनाडा ने जी7 की मेज़बानी की थी, जिसमें लगभग 600 मिलियन डॉलर खर्च हुए थे, जो भारतीय रुपये में लगभग 5,670 करोड़ रुपये बनता है। सुरक्षा पर सबसे अधिक खर्च होता है।
जी7 शिखर सम्मेलन से जुड़े विवाद
- 2003 में अमेरिका द्वारा इराक पर हमले के बाद जी7 बैठक में मतभेद सामने आए थे।
- 1997 में रूस को जी7 का सदस्य बनाया गया था, जिसके बाद समूह का नाम जी8 हो गया। 2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया।
- 2018 में कनाडा ने जी7 की मेज़बानी की, जिसमें मतभेदों का सामना करना पड़ा। कनाडा ने अमेरिकी टैरिफ का विरोध किया, जिसके जवाब में अमेरिका ने भी टैरिफ लगाया। डोनाल्ड ट्रंप ने सम्मेलन के दौरान संयुक्त बयान का समर्थन वापस ले लिया था।