×

ट्रंप का भाषण: युद्ध के अंत की कोई नई योजना नहीं

डोनाल्ड ट्रंप का हालिया भाषण एक बार फिर पुरानी बातें दोहराने का ही एक प्रयास था। उन्होंने खाड़ी में चल रहे संघर्ष के बारे में कोई नई जानकारी नहीं दी और न ही युद्ध समाप्त करने का कोई ठोस खाका पेश किया। ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को सही ठहराया, लेकिन दर्शकों को कोई नई दिशा नहीं दिखाई दी। जानें इस भाषण में क्या कहा गया और क्या उम्मीदें थीं।
 

ट्रंप का संबोधन: पुरानी बातें और कोई नई दिशा नहीं

1 अप्रैल की शाम, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित किया, तो पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं। खाड़ी में एक महीने से चल रहे संघर्ष और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच, उम्मीद थी कि ओवल ऑफिस से शांति वार्ता या सैनिकों की वापसी का कोई ठोस खाका पेश किया जाएगा। लेकिन, 20 मिनट के इस भाषण के बाद दर्शकों को केवल पुरानी बातें सुनाई दीं।


ट्रंप ने कई मुद्दों पर बात की, लेकिन उनमें से कोई भी नया नहीं था। उम्मीद थी कि वे खाड़ी में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की घोषणा करेंगे, जो अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ था।


हालांकि, ट्रंप का भाषण घरेलू मतदाताओं का समर्थन जुटाने के लिए एक तरह की 'सेल्स पिच' बनकर रह गया। उन्होंने युद्ध के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी, जैसे कि समझौते के लिए बातचीत की स्थिति या सैनिकों की वापसी की योजनाएँ। इसके बजाय, उन्होंने अपनी पुरानी शैली में शेखी बघारी और धमकियाँ दीं।


अपने भाषण में, ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य अभियान को ईरान की आक्रामकता का जवाब बताया। उन्होंने ईरान पर भरोसा न करने के अपने पुराने दावे को दोहराया और हाल की हवाई बमबारी को 'ऐसी जीत' बताया जो पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील की और इसे 'अमेरिका के भविष्य में किया गया एक निवेश' बताया।


हालांकि, ट्रंप ने उस महत्वपूर्ण सवाल का कोई नया जवाब नहीं दिया कि यह युद्ध कब समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के रणनीतिक लक्ष्य पूरे होने के करीब हैं, लेकिन ठोस रणनीति का उल्लेख करने से बचते रहे। उन्होंने फिर से वादा किया कि अगले कुछ हफ्तों में ईरान पर बमबारी की जाएगी।


ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की सेना को पूरी तरह से बेअसर कर दिया गया है। उन्होंने अपने पुराने दावों को दोहराते हुए कहा कि ईरान की हवाई सुरक्षा और नेतृत्व खत्म हो चुका है। कूटनीतिक स्तर पर, कोई प्रगति नहीं दिखी।


अपने भाषण में, ट्रंप ने उन देशों को सलाह दी जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मार्ग से तेल पर निर्भर नहीं है और भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा।


ट्रंप की धमकियाँ भी वही पुरानी थीं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना तुरंत हमला कर सकती है और चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो वॉशिंगटन की नजर ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों पर होगी।


कई लोगों के लिए यह एक 'देजा वू' का अनुभव था, लेकिन अधिकांश ने यह महसूस किया कि ट्रंप भले ही लंबी बातें कर सकते हैं, लेकिन ठोस जानकारी बहुत कम देते हैं।


बिना किसी नई जानकारी के, ट्रंप ने फिर से कहा कि अमेरिका किसी भी समझौते के लिए तैयार है, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने एक और धमकी दी। उन्होंने कहा कि ईरान का नया नेतृत्व 'कम कट्टरपंथी और समझदार' है, लेकिन अगर कोई समझौता नहीं होता, तो अमेरिका की नजरें उनके महत्वपूर्ण ठिकानों पर बनी रहेंगी।


जब ट्रंप ने अपने भाषण को एक छोटे से 'धन्यवाद' के साथ समाप्त किया, तो दर्शक हैरान रह गए कि उन्होंने कितनी कम बातें कहीं। अंततः, यह स्पष्ट था कि उन्होंने कोई नई जानकारी नहीं दी और न ही संघर्ष को समाप्त करने का कोई ठोस खाका पेश किया।