डिएगो गार्सिया द्वीप सौदे पर ट्रम्प की ब्रिटेन से नाराजगी
अमेरिकी राष्ट्रपति की चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप को लेकर ब्रिटेन की योजना पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने मंगलवार को ट्रुथ सोशल पर कहा कि ब्रिटेन इस द्वीप को मॉरीशस को सौंपने की सोच रहा है, जबकि यह अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य आधार है। ट्रम्प ने इसे एक गलत और हैरान करने वाला निर्णय बताया।
उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक है कि ब्रिटेन, जो अमेरिका का एक महत्वपूर्ण नाटो सहयोगी है, इस तरह का कदम उठा रहा है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि चीन और रूस ने इस स्थिति को भांप लिया है और ऐसे निर्णयों से अमेरिका की स्थिति कमजोर होती है।
चागोस आइलैंड का ऐतिहासिक संदर्भ
डिएगो गार्सिया, वास्तव में चागोस आइलैंड का हिस्सा है, जो हिंद महासागर में स्थित है। यह ब्रिटेन से लगभग 9,334 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और मॉरीशस से लगभग 2,012 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। यह द्वीप 1814 में नेपोलियन की हार के बाद ब्रिटेन के कब्जे में आया था।
1965 में, इसे ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र के तहत अलग कर दिया गया।
मॉरीशस की आजादी और अधिकार
मॉरीशस को 1968 में स्वतंत्रता मिली थी, और उस समय यह तय हुआ था कि जब यह द्वीप ब्रिटेन की सुरक्षा के लिए आवश्यक नहीं रहेंगे, तब इन्हें वापस किया जाएगा। डिएगो गार्सिया पर ब्रिटेन और अमेरिका का संयुक्त सैन्य अड्डा है।
मॉरीशस ने 1980 के दशक से इन द्वीपों पर अपना अधिकार मांगा है और यह मामला अंतरराष्ट्रीय अदालतों में भी उठाया गया है।
ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच बातचीत
ब्रिटेन की सरकार ने कहा है कि कानूनी चुनौतियों के मद्देनजर स्थिति को स्पष्ट करना आवश्यक है। 2022 में, ब्रिटेन और मॉरीशस ने चागोस आइलैंड्स की संप्रभुता पर बातचीत शुरू की।
ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की सरकार ने 2024 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे मॉरीशस को द्वीपों की संप्रभुता मिलेगी, जबकि ब्रिटेन डिएगो गार्सिया को 99 साल की लीज पर रखेगा।
आर्थिक पहलू
इस समझौते के तहत, प्रारंभिक 99 वर्षों में हर साल औसतन 101 मिलियन पाउंड खर्च होने का अनुमान है। कुल खर्च लगभग 3.4 अरब पाउंड होने की संभावना है।