×

डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के साथ शांति समझौता: क्या है इसके पीछे की सच्चाई?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण शांति समझौते की घोषणा की है, जो मध्य-पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। इस समझौते में इजरायल की भूमिका, होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और ट्रंप की ईरान को दी गई चेतावनियों पर चर्चा की गई है। क्या यह समझौता स्थायी शांति की ओर एक कदम है, या फिर यह केवल एक राजनीतिक चाल है? जानें इस लेख में।
 

ट्रंप का शांति समझौता और इजरायल पर आरोप


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते ने मध्य-पूर्व की राजनीति में हलचल मचा दी है। अपने 80वें जन्मदिन पर 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक साक्षात्कार में, ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर तीखा हमला किया। उन्होंने नेतन्याहू को एक 'टफ गाय' बताते हुए कहा कि उनके समझौते ने इजरायल को संभावित परमाणु हमले से बचाया है। यह शांति समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ है और दोनों पक्ष इसे 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे, जिसकी पुष्टि वाइट हाउस और ईरानी सरकार ने की है।


बेरूत पर हमलों की आलोचना

ट्रंप ने साक्षात्कार में इजरायल के हालिया सैन्य कार्यों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका और ईरान समझौते के करीब थे, तब इजरायल ने बेरूत पर हवाई हमले कर शांति प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया। ट्रंप ने नेतन्याहू को सलाह दी कि उन्हें इस समझौते का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो इजरायल की स्थिति गंभीर होती। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से कमजोर कर दिया है।


होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में भी बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि नए समझौते के बाद यह समुद्री मार्ग हमेशा के लिए 'टोल-फ्री' रहेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल 60 दिनों के लिए लागू होगा। वास्तव में, युद्ध से पहले भी ईरान इस मार्ग पर कोई टोल नहीं ले रहा था, जिसे ट्रंप अपनी जीत के रूप में पेश कर रहे हैं।


ईरान को चेतावनी

ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि वह परमाणु समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका क्षेत्र की कुल कमाई का 20 प्रतिशत वसूल कर खुद को 'मिडिल ईस्ट का संरक्षक' घोषित करेगा।


परमाणु दावों की सच्चाई

ट्रंप ने अपने नए समझौते की तुलना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2015 के न्यूक्लियर डील से की और कहा कि उनका कदम अधिक मजबूत है। हालांकि, कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने ट्रंप के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया है। असल में, ईरान ने 1970 में 'नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी' पर हस्ताक्षर करके परमाणु हथियार न बनाने का संकल्प लिया था।