डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर बड़ा यू-टर्न: इजरायल को मिली सोशल मीडिया से जानकारी
ट्रंप का निर्णय और इजरायल की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्णय लेने की शैली एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। इस बार इजरायल को बड़ा झटका लगा है। इजरायल के चैनल 12 की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर एक विशाल हमले की योजना बनाई थी, लेकिन अचानक उन्होंने इसे रद्द कर दिया।
इजरायली अधिकारियों को इस बदलाव की जानकारी घंटों तक नहीं मिली। एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने कहा, "हम काफी समय तक अनिश्चितता में रहे।" अधिकारी के अनुसार, ट्रंप ने कोई सीधी सूचना नहीं दी, और इजरायल के रक्षा और राजनयिक अधिकारियों को इस बारे में ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट से पता चला।
हमले की योजना और अंतिम क्षण का मोड़
"दुनिया का सबसे बड़ा हमला" रुक गया
ट्रंप ने मीडिया में कहा कि यह हमला "दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला" होने वाला था। लेकिन अंतिम क्षण में ईरान और उसके पड़ोसी देशों ने उनसे रुकने की अपील की। ट्रंप के अनुसार, "उन्होंने कहा कृपया ऐसा मत कीजिए। इसलिए अब हम देखेंगे कि क्या परमाणु हथियारों को खत्म करने पर कोई समझौता हो सकता है।" इसका मतलब है कि योजना तैयार थी, लेकिन ट्रंप ने अंतिम क्षण में कदम पीछे खींच लिए। यह पहली बार नहीं है, पिछले पांच महीनों में वह कई बार ऐसे यू-टर्न ले चुके हैं।
सोशल मीडिया से मिली जानकारी
सोशल मीडिया से पता चला फैसला
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज और अन्य प्रमुख अधिकारियों को इस बारे में सीधे फोन या मीटिंग के माध्यम से नहीं बताया गया। उन्हें 'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप की पोस्ट देखकर पता चला कि हमला रद्द कर दिया गया है।
शुरुआत में इजरायल को लगा कि यह ईरान को धोखा देने की कोई चाल हो सकती है। लेकिन बाद में इजरायली सैन्य और राजनयिक अधिकारियों ने अमेरिकी समकक्षों से बात करके पुष्टि की कि ट्रंप ने सच में अपना मन बदल लिया है। इजरायल को लगा कि इस महत्वपूर्ण निर्णय में उसे नजरअंदाज किया गया।
पिछले पांच महीनों का पैटर्न
5 महीने से चल रहा है यही पैटर्न
ईरान के खिलाफ चल रही जंग में अमेरिका और इजरायल एक साथ हैं। लेकिन ट्रंप अक्सर महत्वपूर्ण निर्णय अकेले ही लेते हैं। कई बार हमले की घोषणा करते हैं, फिर कूटनीति का हवाला देकर पीछे हट जाते हैं।
इजरायल की नाराजगी इस बात को लेकर है कि योजना बनाने में कई लोग शामिल होते हैं, लेकिन रद्द करने का निर्णय ट्रंप अकेले लेते हैं और दोस्तों को बताना जरूरी नहीं समझते। वर्तमान में अमेरिका का ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने पर है।
ट्रंप का कहना है कि हमले के बजाय बातचीत से समाधान निकाला जा सकता है। लेकिन इजरायल के लिए यह अनिश्चितता एक समस्या बन रही है। क्योंकि युद्ध के मैदान में साथ रहने के बावजूद महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी सोशल मीडिया से मिलती है, तो भरोसा कैसे बनेगा।