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डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर हमला: क्या है बातचीत का सच?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला करते हुए उनके दोहरे रवैये की आलोचना की है। ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति वार्ता के दावों को खारिज करने पर गुस्सा जताया। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि जब तक वे समझौते के लिए तैयार नहीं होते, तब तक कोई सामान ईरान नहीं पहुंचेगा। ईरान ने इस बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। जानें, इस विवाद के पीछे की सच्चाई और ट्रंप के लक्ष्यों के बारे में।
 

ट्रंप का ईरान पर तीखा हमला


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक विस्तृत पोस्ट में ईरानी नेतृत्व को "अविश्वसनीय रूप से दोहरे रवैये वाला" करार दिया। ट्रंप का गुस्सा तब भड़का जब ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित शांति वार्ता के उनके दावे को खारिज कर दिया।


ट्रंप का दोहरे व्यवहार पर आरोप

ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेता एक ओर बैठक की मांग करते हैं, जिसे कुछ लोग "भीख मांगना" भी मानते हैं। वार्ता शुरू होती है, तारीखें तय होती हैं, लेकिन फिर वे सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि कोई चर्चा नहीं हो रही, हम तो केवल ओमान से बात कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी, "जब तक ईरान किसी समझौते या पूर्ण सरेंडर के लिए तैयार नहीं होता, तब तक कोई सामान ईरान नहीं पहुंचेगा।"


होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद

ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर तेहरान के दावे को भी खारिज किया। ईरान का कहना है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर उसका नियंत्रण है, जबकि ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना पहले से ही इसे नियंत्रित कर रही है और इसे उन्होंने नौसैनिक नाकेबंदी बताया। उन्होंने दोहराया कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


ईरान का जवाब: कोई बातचीत नहीं

विवाद की शुरुआत रविवार को हुई, जब ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि सैन्य हमले रोक दिए गए हैं क्योंकि कूटनीति की गुंजाइश बची है। उन्होंने दावा किया, "अब हम बातचीत कर रहे हैं। ये कल दोपहर शुरू होगी।" लेकिन कुछ घंटों बाद ही ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।


ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं चल रही और अगले दिनों में किसी बैठक की योजना भी नहीं है। उन्होंने कहा कि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को बुलाने या अपने वार्ताकारों को बाहर भेजने का कोई इरादा नहीं है।


फिलहाल केवल ओमान से होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन पर चर्चा हो रही है। एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि वाशिंगटन से बातचीत का कोई प्लान नहीं है। विदेश मंत्री अब्बास अराकची इराक में हैं और इस हफ्ते उपलब्ध नहीं होंगे।


गतिरोध की स्थिति

यह पूरा मामला पिछले 5 महीनों से चल रहे पैटर्न को दर्शाता है। ट्रंप ने "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के तहत इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर दबाव बनाया था। कई बार बड़े हमले की घोषणा की, फिर कहा कि बातचीत के कारण रुक गए।


जून में एक समझौता हुआ था, लेकिन जुलाई की शुरुआत में वह टूट गया। तब से ईरान अमेरिका से सीधी बात करने से मना कर रहा है। ट्रंप अब तक अपने तीन बड़े लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सके हैं - ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म करना, क्षेत्र में तेहरान के प्रभाव को रोकना और राजनीतिक बदलाव लाना।


हर बार जब अमेरिका तनाव बढ़ाता है, ईरान जवाब में अमेरिकी सेना, खाड़ी सहयोगियों या कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाता है। फिर तनाव थोड़ा कम हो जाता है। वर्तमान में सबसे बड़ा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि जून के समझौते के तहत ईरान जहाजों की आवाजाही खुली रखे, जबकि ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य पर उसका हक बना रहेगा।