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डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड पर नया बयान: क्या है इसके पीछे की रणनीति?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड पर एक तस्वीर साझा की है, जिसने वैश्विक राजनीतिक हलकों में बहस को जन्म दिया है। ट्रंप की इस पोस्ट को कई लोग मजाकिया मानते हैं, जबकि कुछ इसे अमेरिका की रणनीतिक सोच का संकेत मानते हैं। अमेरिका के विशेष दूत जेफ लेनडरी ने ग्रीनलैंड का दौरा किया और वहां के नेताओं से मुलाकात की। ग्रीनलैंड में अमेरिका की बढ़ती गतिविधियों के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया है। जानें, ग्रीनलैंड की बढ़ती अहमियत और ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर पूर्व की इच्छाओं के बारे में।
 

ट्रंप का ग्रीनलैंड के प्रति नया रुख


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के कारण चर्चा में हैं। इस बार उनका ध्यान ग्रीनलैंड पर केंद्रित है, जहां उन्होंने एक तस्वीर साझा की है, जिसने वैश्विक राजनीतिक हलकों में बहस को जन्म दिया है। इस तस्वीर में ट्रंप ग्रीनलैंड की ओर देखते हुए नजर आ रहे हैं, और उन्होंने लिखा है, 'Hello, Greenland!' दिलचस्प बात यह है कि ग्रीनलैंड को अब ईरान और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच तेल आपूर्ति के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है।


अमेरिकी दूत का ग्रीनलैंड दौरा

हाल ही में अमेरिका के विशेष दूत जेफ लेनडरी ने ग्रीनलैंड का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां के राजनीतिक नेताओं और व्यापारिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की। लेनडरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बातचीत में सुरक्षा, आर्थिक विकास और आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका-ग्रीनलैंड सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि अमेरिका आने वाले महीनों में ग्रीनलैंड के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की योजना बना रहा है।


ग्रीनलैंड में अमेरिकी गतिविधियों का विरोध

अमेरिका की बढ़ती गतिविधियों के खिलाफ ग्रीनलैंड में विरोध के स्वर भी तेज हो गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी नूक में सैकड़ों लोगों ने नए अमेरिकी वाणिज्य दूतावास भवन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर थे जिन पर लिखा था, 'हम आपका पैसा नहीं चाहते' और 'ग्रीनलैंड के लोग MAGA ट्रोजन हॉर्स को पहचानते हैं।' कई लोग 'Go Away!' के नारे लगाते हुए भी नजर आए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अमेरिका आर्थिक मदद और सुरक्षा सहयोग के नाम पर ग्रीनलैंड में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।


ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीदने की इच्छा

ट्रंप की ग्रीनलैंड के प्रति रुचि नई नहीं है। अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा व्यक्त की थी, जो उस समय चर्चा का विषय बन गया था। डेनमार्क समेत कई देशों ने इसका विरोध किया था। हालांकि, ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।


ग्रीनलैंड की बढ़ती रणनीतिक अहमियत

पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच, ग्रीनलैंड को ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है। अमेरिकी दूत जेफ लेनडरी का कहना है कि ग्रीनलैंड हर दिन लगभग 20 लाख बैरल तेल उत्पादन करने की क्षमता रखता है। यदि ऐसा होता है, तो होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया की निर्भरता कम हो सकती है। लेनडरी के अनुसार, यदि तेजी से काम किया जाए, तो अगले 10 महीनों में वहां तेल उत्पादन शुरू किया जा सकता है।


आर्कटिक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा

आर्कटिक क्षेत्र में रूस, चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने ग्रीनलैंड की अहमियत को और बढ़ा दिया है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, दुर्लभ खनिजों, तेल भंडार और समुद्री मार्गों के कारण वैश्विक शक्तियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।