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डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा: क्या अमेरिका की स्थिति कमजोर हो रही है?

डोनाल्ड ट्रंप का हालिया चीन दौरा कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए था, लेकिन यह उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेद सामने आए। ट्रंप की यात्रा को 2017 की तुलना में 'डाउनग्रेड' माना जा रहा है, और चीन ने अमेरिका पर कई मोर्चों पर दबाव बनाया। जानिए इस दौरे के प्रमुख बिंदुओं के बारे में।
 

ट्रंप का बीजिंग दौरा समाप्त


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन दिन का चीन दौरा समाप्त करते हुए शुक्रवार (15 मई 2026) को बीजिंग से वापसी की। यह यात्रा 2017 के बाद से किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा थी। ट्रंप ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ईरान, व्यापार और ताइवान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। हालांकि, कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे को 2017 की तुलना में 'डाउनग्रेड' किया गया है, क्योंकि दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।


चीन का स्वागत और प्रोटोकॉल

ट्रंप के स्वागत के लिए चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग एयरपोर्ट पर मौजूद थे, जो नीति निर्माण में कोई विशेष प्रभाव नहीं रखते। यह संकेत माना गया कि बीजिंग अब अमेरिका को पहले जैसी प्राथमिकता नहीं दे रहा है।


व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग के अनुसार, दोनों नेताओं ने केवल इस बात पर सहमति जताई कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रहना चाहिए। ट्रंप ने शी और उनकी पत्नी को 24 सितंबर को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी दिया।


शी जिनपिंग का संदेश

बैठक के दौरान, शी जिनपिंग ने प्राचीन यूनानी विचार 'थ्यूसिडाइड्स ट्रैप' का उल्लेख किया, जिसका अर्थ है कि एक उभरती हुई शक्ति जब स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है, तो टकराव का खतरा बढ़ जाता है। जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि चीन अब अमेरिका को चुनौती देने वाली शक्ति बन चुका है और अमेरिका को इसे स्वीकार करना होगा।


ताइवान पर कड़ा रुख

सूत्रों के अनुसार, ताइवान के मुद्दे पर शी का रुख काफी सख्त था। उन्होंने इसे 'शांति बनाम आजादी' की लड़ाई बताया और अमेरिका को चेतावनी दी कि गलत कदम दोनों देशों के बीच सीधे टकराव का कारण बन सकता है। इस मुद्दे पर ट्रंप की चुप्पी पर भी सवाल उठे हैं।


व्यापार में चीन का दबदबा

डोनाल्ड ट्रंप 500 बोइंग विमानों के ऑर्डर की उम्मीद लेकर गए थे, लेकिन चीन ने केवल 200 जेट का सौदा किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि व्यापारिक शर्तों पर बीजिंग की स्थिति मजबूत हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अब 'रिस्क मैनेजमेंट' मोड में हैं, खासकर रेयर अर्थ मिनरल्स के संदर्भ में, जिन पर चीन का 90% नियंत्रण है और जो अमेरिकी तकनीक और रक्षा उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।


ईरान पर कोई ठोस समझौता नहीं

ईरान के मुद्दे पर कोई महत्वपूर्ण समझौता नहीं हुआ। दोनों पक्ष केवल इस बात पर सहमत हुए कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कोई ठोस योजना सामने नहीं आई। कुल मिलाकर, ट्रंप का यह दौरा अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा, और चीन ने प्रोटोकॉल, ताइवान और व्यापार के मोर्चे पर अमेरिका पर दबाव बनाया।