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डोनाल्ड ट्रंप का नया टैरिफ फैसला: क्या वैश्विक व्यापार में आएगी हलचल?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयात शुल्क को 10% से बढ़ाकर 15% करने का निर्णय लिया है, जो वैश्विक व्यापार में हलचल पैदा कर सकता है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया है, जिसने उनके पुराने टैरिफ कार्यक्रम को अवैध ठहराया था। ट्रंप का यह नया निर्णय भारत और यूरोप जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर प्रभाव डालेगा। जानें इस फैसले के पीछे की रणनीति और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
 

ट्रंप का टैरिफ बढ़ाने का निर्णय


नई दिल्ली : वॉशिंगटन से एक महत्वपूर्ण खबर आई है, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बड़ा बदलाव करते हुए आयात शुल्क में वृद्धि की है। शनिवार को उन्होंने घोषणा की कि अब सभी देशों से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत की जगह 15 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें उनके पूर्व टैरिफ कार्यक्रम को अवैध ठहराया गया था। ट्रंप के इस कदम ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप की प्रतिक्रिया

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके टैरिफ कार्यक्रम को रद्द किए जाने से ट्रंप काफी असंतुष्ट नजर आए। कोर्ट ने आपातकालीन कानून के तहत इन शुल्कों को अवैध ठहराया था। इसके जवाब में, ट्रंप ने शुक्रवार को 10 प्रतिशत के तत्काल शुल्क का आदेश दिया। उनका मानना है कि भले ही अदालत का फैसला पुरानी व्यवस्था को प्रभावित करता है, वे हार नहीं मानेंगे और एक नए कानूनी विकल्प की तलाश शुरू कर दी है।


15 प्रतिशत का नया टैरिफ

शनिवार को ट्रंप ने टैरिफ को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्णय लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि वे उन देशों पर शुल्क बढ़ा रहे हैं जो दशकों से अमेरिका का लाभ उठाते आ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल से पहले इन देशों से कोई हिसाब नहीं मांगा गया था। अब वे पूरी 15 प्रतिशत सीमा का उपयोग करेंगे।


150 दिनों की अस्थायी अवधि

अमेरिकी राष्ट्रपति को बिना किसी लंबी प्रक्रिया के 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार है। ट्रंप इस समय का उपयोग अपनी भविष्य की रणनीति तैयार करने के लिए करना चाहते हैं। इस अवधि के दौरान उनका प्रशासन नए और 'कानूनी रूप से मान्य' नियमों पर काम करेगा। यह एक अस्थायी उपाय है ताकि अमेरिकी उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जा सके।


नई कानूनी रणनीति पर ध्यान

ट्रंप प्रशासन अब ऐसे टैरिफ विकसित करने की प्रक्रिया में है, जिन्हें भविष्य में कानूनी चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़े। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि वे केवल शुल्क बढ़ाकर नहीं रुकेंगे, बल्कि इसे स्थायी बनाने के लिए नए नियमों का सेट जारी करेंगे। व्हाइट हाउस के विशेषज्ञ पुराने कानूनों और अदालती मिसालों का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि अमेरिका को वैश्विक व्यापार मंच पर फिर से मजबूत स्थिति में लाया जा सके।


वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

ट्रंप के इस निर्णय का सीधा असर भारत और यूरोप जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर पड़ेगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम को अदालतों में चुनौती दी जा सकती है, लेकिन इसके तुरंत बाद आयातित सामान महंगा हो जाएगा। ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने वैश्विक कूटनीति में व्यापार युद्ध की संभावनाओं को फिर से हवा दी है। अब सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं और अमेरिकी बाजारों में होने वाले परिवर्तनों पर हैं।