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डोनाल्ड ट्रंप का फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों पर बयान: इमिग्रेशन को बताया मुख्य कारण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में फ्रांस में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि फ्रांस की समस्याओं का मुख्य कारण इमिग्रेशन है, न कि शिक्षा। ट्रंप ने डेमोक्रेट सीनेटर जॉन ओसॉफ पर भी निशाना साधा और अमेरिका में इमिग्रेशन नियमों में सख्ती की बात की। जानें इस मुद्दे पर उनके विचार और फ्रांस में हालात कैसे हैं।
 

ट्रंप का बयान


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में फ्रांस में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फ्रांस में अशांति का मुख्य कारण यह है कि उसने उन लोगों के लिए अपनी सीमाएं खोली हैं, जो उससे नफरत करते हैं। यह टिप्पणी ट्रंप ने जॉर्जिया के पेरी में एक रिपब्लिकन चुनावी रैली के दौरान की।


शिक्षा नहीं, इमिग्रेशन है समस्या

ट्रंप ने फ्रांसीसी सरकार के उस बयान को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि प्रदर्शन शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस में पुलिस मौजूद है, लेकिन उसे प्रभावी ढंग से काम करने नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारी फ्रांस और उसकी संस्कृति से नफरत करते हैं। ट्रंप ने इस मुद्दे को अमेरिका की इमिग्रेशन नीति से जोड़ते हुए डेमोक्रेट सीनेटर जॉन ओसॉफ पर भी निशाना साधा।


उन्होंने कहा, "हम फ्रांस की तरह नहीं हैं। हम नफरत फैलाने वालों को अपने देश में प्रवेश नहीं करने देंगे, लेकिन ओसॉफ जैसे नेता अमेरिका विरोधी और तीसरी दुनिया के प्रवासियों को लाने की कोशिश कर रहे हैं, जो केवल हमारी संस्कृति को नष्ट करने के इरादे से आते हैं। हम ऐसा नहीं होने देंगे।"


अमेरिका में इमिग्रेशन नियमों में बदलाव

ट्रंप के पुनः राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका में इमिग्रेशन नियमों में काफी सख्ती आई है। प्रशासन ने अब तक 3 लाख से अधिक वीजा रद्द किए हैं, जिसकी पुष्टि स्टेट डिपार्टमेंट ने की है। हाल ही में, भारत की टीसीएस और इंफोसिस जैसी 8 कंपनियों की कुछ ग्रीन कार्ड फाइलिंग भी रोक दी गई हैं। इसके अलावा, 9 प्रमुख विश्वविद्यालयों में वीजा धोखाधड़ी और अमेरिकी नौकरियों पर प्रभाव डालने के आरोपों की जांच भी शुरू की गई है।


फ्रांस में हालात

शनिवार को पेरिस में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच गंभीर झड़पें हुईं। पुलिस को आंसू गैस और वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर प्रक्षिप्त वस्तुएं फेंकीं। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में लगभग 4 लाख 10 हजार लोग सड़कों पर उतरे। पेरिस में सबसे बड़ा प्रदर्शन हुआ, जिसमें दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में 1 लाख 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण रही, लेकिन बाद में यह हिंसक हो गई।