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डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: पाकिस्तान के अनुरोध पर हुआ ईरान के साथ युद्धविराम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम के संबंध में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना की। ट्रंप ने कहा कि यह निर्णय पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया गया था और ईरान पर किसी भी प्रकार की बमबारी की योजना नहीं है। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी कड़ा रुख अपनाया है। जानें इस बयान के पीछे की पूरी कहानी और ट्रंप के विचार।
 

ट्रंप का ईरान के साथ संघर्ष विराम पर बयान


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम के संबंध में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया गया था, और इसे पाकिस्तान के प्रति एक 'उपकार' के रूप में देखा जा सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान पर किसी भी प्रकार की बमबारी की योजना नहीं है।


पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना

चीन से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता ने युद्ध को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए उन्हें 'शानदार लोग' कहा।


ट्रंप का युद्धविराम पर बयान

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'हमने दूसरे देश के अनुरोध पर युद्धविराम किया। मुझे इससे वास्तव में लाभ होता, लेकिन हमने पाकिस्तान पर एहसान करते हुए ऐसा किया। फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री दोनों ही शानदार लोग हैं।'


अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई 28 फरवरी से शुरू की थी, और 8 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद दोनों पक्ष युद्धविराम पर सहमत हुए।


ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप का कड़ा रुख

ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि तेहरान द्वारा वर्षों से जमा किए गए समृद्ध यूरेनियम को वापस लेना अमेरिका की प्राथमिकता है।


अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, ईरानी वार्ताकारों ने स्वीकार किया कि अमेरिकी हवाई हमलों ने उनकी परमाणु सुविधाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप ने कहा, 'उन्होंने एक भयानक रहस्य उजागर किया है। उन्होंने कहा कि वे इसे हटा नहीं सकते क्योंकि उनके पास इसे हटाने की तकनीक नहीं है।'


होर्मुज जलडमरूमध्य पर चर्चा

ट्रंप ने यह भी बताया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के पक्ष में हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


अमेरिका-ईरान वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरानी नेताओं के साथ प्रत्यक्ष बातचीत की थी। इसी वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ी।


अमेरिका ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को समाप्त करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता देनी होगी, जिसके बदले में प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति जारी की जाएगी।