डोनाल्ड ट्रंप का विवादास्पद बयान: ईरान पर बमबारी का किया बचाव
ट्रंप का आक्रामक बयान
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादास्पद और आक्रामक बयान दिया है। डलास में मिड-टर्म चुनाव प्रचार के दौरान, ट्रंप ने तेहरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी वायुसेना के बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने ईरान की परमाणु सुविधाओं को समय पर नष्ट नहीं किया होता, तो आज तेहरान के पास परमाणु बम होता और उन्हें मजबूरन ईरानी सुप्रीम लीडर को 'सर' कहकर संबोधित करना पड़ता।
महंगाई और जन असंतोष पर ट्रंप का जवाब
मिड-टर्म चुनावों के नजदीक, ट्रंप ने युद्ध-विरोधी मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए स्वीकार किया कि कई लोग ईंधन की बढ़ती कीमतों और युद्ध के लंबे खिंचाव की शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान जानबूझकर अमेरिकी राजनीति को प्रभावित करने के लिए इस युद्ध को खींच रहा है, लेकिन वे इसे अधिक समय तक नहीं चलने देंगे। ट्रंप ने आश्वासन दिया कि चुनाव खत्म होने के कुछ दिनों बाद इस सैन्य अभियान को समाप्त कर दिया जाएगा।
'ब्यूटीफुल B-2 बॉम्बर्स' से परमाणु ठिकानों को तबाह किया गया
अपने विशेष भाषण शैली में, ट्रंप ने कहा कि न्यूक्लियर डील को रद्द करके, पहाड़ों के बीच स्थित ईरान की परमाणु फैसिलिटी पर कई टन बम गिराए गए थे। उनके अनुसार, यदि यह साहसिक कदम नहीं उठाया जाता, तो ईरान आज एक परमाणु शक्ति बन चुका होता और अमेरिका को उसके सामने झुकना पड़ता। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि आज परमाणु खतरे के अभाव में उन्हें ईरानी नेतृत्व से यह नहीं पूछना पड़ रहा कि 'मिस्टर सुप्रीम लीडर सर, आपके लिए मैं क्या कर सकता हूं।'
यूरोप और इजरायल के लिए परमाणु खतरे की चेतावनी
ट्रंप ने ईरान को एक चरमपंथी धार्मिक शासन बताते हुए कहा कि यदि तेहरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता, तो उसका पहला निशाना अमेरिका नहीं, बल्कि यूरोप और मध्य पूर्व के देश होते। उन्होंने कहा कि ईरान केवल चीन या रूस जैसी पारंपरिक शक्तियों की तरह नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक शासन है जो यूरोप पर भी परमाणु हमला करने से नहीं हिचकिचाएगा। ट्रंप ने अमेरिका द्वारा ईरान में की जा रही सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि इन हमलों के माध्यम से लाखों निर्दोष जिंदगियों को बचाया गया है।
वैश्विक व्यवस्था में परमाणु हथियारों का बदलता संतुलन
ट्रंप का यह बयान वैश्विक मंच पर उठते सवालों के बीच आया है, जहां यह माना जा रहा है कि गैर-परमाणु देश लगातार बड़ी शक्तियों की सैन्य कार्रवाई का शिकार हो रहे हैं। यूक्रेन द्वारा सुरक्षा गारंटी के बदले अपने परमाणु हथियार त्यागने और इराक के सद्दाम हुसैन के हश्र का उदाहरण देते हुए विश्लेषक मानते हैं कि मौजूदा वैश्विक दौर में रक्षा के लिए परमाणु हथियार एक केंद्रीय विषय बन चुके हैं। ट्रंप के इस रुख से स्पष्ट है कि वाशिंगटन किसी भी स्थिति में पश्चिम एशिया के शक्ति संतुलन को अपने खिलाफ नहीं झुकने देना चाहता।