डोनाल्ड ट्रंप का व्यापार टैरिफ विवाद: भारत भी शामिल
ट्रंप का व्यापारिक निर्णय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों के साथ व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने कुछ देशों पर भारी टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है, जिसमें भारत भी शामिल है। भारत के लिए टैरिफ की समय सीमा को उन्होंने 7 अगस्त तक बढ़ा दिया है। इस निर्णय की अमेरिका में आलोचना हो रही है।
प्रेस कांफ्रेंस में तनाव
गुरुवार को व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान, ट्रंप एक रिपोर्टर के सवाल पर भड़क गए। जब रिपोर्टर ने पूछा कि उन्होंने पहले कार्यकाल में टैरिफ लगाने वाले कानून को लागू क्यों नहीं किया, तो ट्रंप ने जवाब दिया कि वह 'पागलों' से लड़ने में व्यस्त थे। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बहस तब और बढ़ गई जब रिपोर्टर ने एक संघीय अपीलीय अदालत का उल्लेख किया, जो ट्रंप के टैरिफ लगाने के अधिकार पर सुनवाई कर रही है।
टैरिफ कानून का संदर्भ
ट्रंप के टैरिफ बम से हिली पूरी दुनिया
ट्रंप ने टैरिफ कानून को 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लागू किया है। इस पर संघीय अपीलीय अदालत में सुनवाई चल रही है। गुरुवार को अदालत ने मौखिक बहस सुनी। रिपोर्टर ने ट्रंप से कानूनी दलीलों पर विचार करने के लिए नहीं कहा, लेकिन ट्रंप ने कहा कि हम हमेशा जीतते आ रहे हैं।
ट्रंप की नाराजगी
रिपोर्टर पर भड़के ट्रंप
रिपोर्टर ने ट्रंप पर दबाव डालते हुए एक और सवाल पूछा कि उन्होंने पहले कार्यकाल में यह कानून क्यों नहीं लागू किया। ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वह अपने पहले कार्यकाल में 'पागलों' से लड़ने में व्यस्त थे, जो एक निर्वाचित राष्ट्रपति के साथ अनुचित व्यवहार कर रहे थे।
चीन पर टैरिफ का प्रभाव
चीन पर लगाए टैरिफ
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि टैरिफ वास्तव में उनके पहले कार्यकाल के दौरान चीन पर लगाए गए थे, जिससे अमेरिका ने अरबों डॉलर प्राप्त किए। उन्होंने कहा कि मीडिया ने इस मुद्दे को सही तरीके से नहीं उठाया। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने 2018 से चीनी उत्पादों पर टैरिफ लागू किए थे, जिसमें पहले 50 अरब डॉलर के उत्पाद शामिल थे, जिन्हें 2019 में बढ़ा दिया गया था।