डोनाल्ड ट्रंप की चुनौतियाँ: अमेरिका में बढ़ता असंतोष और ईरान का दबाव
अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ बढ़ता गुस्सा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की छवि को गंभीर नुकसान हो रहा है। उनके दूसरे कार्यकाल की कई योजनाएँ अब संकट में हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की स्थिति
डोनाल्ड ट्रंप अब जिमी कार्टर के बाद किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की तुलना में सबसे कमजोर स्थिति में नजर आ रहे हैं। 1979-80 में ईरान ने अमेरिकी बंधकों को पकड़कर जिमी कार्टर पर दबाव बनाया था, और अब ईरान चुनाव से पहले ट्रंप पर भी दबाव बना सकता है।
एक सप्ताह पहले, ट्रंप की टीम ने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का समझौता जल्द ही होगा, लेकिन अब ईरान ने शर्तें थोपना शुरू कर दिया है।
ईरान की मांगें
ईरान अमेरिका से समुद्री नाकाबंदी हटाने, क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं को वापस बुलाने, युद्ध के मुआवजे और प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। ट्रंप इन शर्तों को स्वीकार नहीं कर सकते, जिससे होर्मुज का गतिरोध समाप्त नहीं होगा और उनकी छवि और खराब होगी।
आर्थिक चुनौतियाँ
डोनाल्ड ट्रंप घरेलू अर्थव्यवस्था की चुनौतियों में भी फंसे हुए हैं। युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं, और पेट्रोल का औसत मूल्य फिर से 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर चला गया है। लोग महंगाई और स्वास्थ्य सेवाओं की ऊंची कीमतों से परेशान हैं। हाल ही में जुलाई में 23,000 नौकरियों में कमी की खबर आई है। व्हाइट हाउस का कहना है कि अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन आम जनता को ऐसा नहीं लग रहा है।
ट्रंप की आत्ममुग्धता
डोनाल्ड ट्रंप अपनी पीठ थपथपाने में लगे हैं, लेकिन अमेरिकियों को उनकी नीतियाँ पसंद नहीं आ रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के आलोचक अब खुलकर कह रहे हैं कि वह आम लोगों की समस्याओं से दूर हैं। लोग अब ट्रंप से नहीं, बल्कि रिपब्लिकन पार्टी से नाराज हैं। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि सुरक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर लोगों का भरोसा रिपब्लिकन पार्टी की पुरानी नीतियों पर घट रहा है।
डेमोक्रेट्स की खुशी
डेमोक्रेट्स का मानना है कि नए हालात ट्रंप के खिलाफ वोट पाने का एक अवसर बन सकते हैं। ईरान के मुद्दे पर ट्रंप का कहना है कि वह धीरे-धीरे काम कर रहे हैं और अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। उनके समर्थक भी मानते हैं कि यदि फिर से युद्ध होता है, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।