डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क नीति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 100 अरब डॉलर की वापसी
डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क नीति पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय
नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार युद्ध को बढ़ावा देने वाली डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क नीति अब उनके लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। पिछले वर्ष, ट्रंप प्रशासन ने विभिन्न देशों से आने वाले सामानों पर भारी शुल्क लागू किए, जिससे अमेरिका में और बाहर आर्थिक हलचल मच गई। अब, इस नीति को कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत वसूले गए शुल्कों को अवैध करार देते हुए खारिज कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, प्रशासन को अब तक लगभग 100 अरब डॉलर की राशि वापस लौटानी पड़ी है।
रिफंड प्रक्रिया की रिपोर्ट अदालत में पेश
अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में दायर याचिका में सीमा शुल्क अधिकारियों ने रिफंड प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद से सरकार की आधिकारिक प्रणाली के माध्यम से लगभग 100 अरब डॉलर (ब्याज सहित) की वापसी का कार्य पूरा हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के अधिकारों को सीमित किया
इस वर्ष 20 फरवरी को, सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की पीठ ने 6-3 के अंतर से एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 1977 का IEEPA कानून राष्ट्रपति को व्यापारिक टैक्स लगाने की अनुमति नहीं देता।
नई राजनीतिक हलचल का जन्म
इस रिफंड की प्रक्रिया अब एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे रही है। आलोचकों और विपक्षी नेताओं का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन यह अरबों डॉलर उन बड़े आयातकों और कॉरपोरेट घरानों को वापस कर रहा है, जिन्होंने पहले टैक्स चुकाया था। इस ट्रेड वॉर के कारण बढ़ी महंगाई का बोझ आम अमेरिकी जनता ने उठाया था। ऐसे में यह रिफंड उपभोक्ताओं तक पहुंचने के बजाय फिर से बड़ी कंपनियों के खातों में जा रहा है, जिससे ट्रंप प्रशासन एक नए आर्थिक-राजनीतिक विवाद में उलझता नजर आ रहा है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा IEEPA के तहत वसूले गए शुल्कों को अवैध करार दिया है। जजों का कहना है कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए बनाए गए कानून का इस तरह व्यापक टैरिफ लगाने में उपयोग करना राष्ट्रपति के अधिकारों का उल्लंघन है। इस निर्णय के बाद से लगभग 166 अरब डॉलर के कुल टैरिफ संग्रह में से आधे से अधिक की राशि वापस की जा चुकी है।