डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में भारत-अमेरिका व्यापार विवाद का खुलासा
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल पर लिखी गई एक नई किताब में भारत द्वारा अमेरिकी सामानों पर लगाए गए टैरिफ को लेकर ट्रंप और उनके वाणिज्य सचिव के बीच तनावपूर्ण चर्चाओं का खुलासा हुआ है। इस किताब में बताया गया है कि ट्रंप ने अधिकारियों पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और भारत के टैरिफ को लेकर अपने विचार साझा किए। इसके अलावा, अमेरिका और भारत के बीच व्यापार संबंधों में बढ़ते तनाव और व्यापार वार्ता के पुनः आरंभ होने की जानकारी भी दी गई है।
Jun 24, 2026, 16:38 IST
भारत के टैरिफ पर ट्रंप का गुस्सा
एक नई किताब में, जो डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल पर आधारित है, भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ को लेकर ट्रंप और उनके वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के बीच तनावपूर्ण बातचीत का विवरण दिया गया है। 'रेजिम चेंज: इनसाइड द इंपीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप' नामक इस पुस्तक में बताया गया है कि व्यापार संबंधों पर चर्चा के दौरान ट्रंप ने अधिकारियों पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। यह किताब न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकारों मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान द्वारा लिखी गई है, जो ट्रंप प्रशासन के महत्वपूर्ण निर्णयों और आंतरिक मतभेदों की जानकारी प्रदान करती है।
ट्रंप ने आंकड़ों पर उठाए सवाल
लेखकों के अनुसार, ट्रंप का मानना था कि भारत अमेरिकी सामानों पर लगाए गए टैरिफ के बारे में US ट्रेड अधिकारियों द्वारा बताए गए आंकड़ों से कहीं अधिक टैरिफ लगाता है। एक चर्चा के दौरान, ट्रंप ने भारत और चीन जैसे देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ के बारे में ठोस आंकड़े मांगे। जब अधिकारियों ने यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) से डेटा प्रस्तुत किया, तो ट्रंप ने उन आंकड़ों को खारिज कर दिया और अपनी टीम पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। किताब में कहा गया है कि ट्रंप का मानना था कि भारत की टैरिफ दरें लगभग 175 प्रतिशत या उससे अधिक थीं, जो US एजेंसियों द्वारा बताए गए आंकड़ों से कहीं अधिक थीं।
व्यापार संबंधों में बढ़ता तनाव
यह मतभेद उस समय सामने आया जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापार संबंध लगातार तनावपूर्ण हो रहे थे। व्हाइट हाउस ने बार-बार भारत के टैरिफ ढांचे की आलोचना की और इसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा लगाए गए सबसे ऊंचे टैरिफ में से एक बताया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि भारतीय बाजार में अमेरिकी निर्यातकों को बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता था। यह मुद्दा ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का निर्णय लिया, और बाद में भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की। इस कदम से कुछ भारतीय आयातों पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक बढ़ गया, जिससे भारत उन देशों में शामिल हो गया, जिन्हें उस समय वॉशिंगटन के सबसे कड़े व्यापार उपायों का सामना करना पड़ा। इस निर्णय ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक तनाव को बढ़ा दिया।
व्यापार वार्ता का पुनः आरंभ
हालांकि मतभेद बने रहे, दोनों देशों ने आर्थिक संबंधों को सुधारने के प्रयास जारी रखे। फरवरी 2026 में, भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा की घोषणा की, जिसका उद्देश्य व्यापार की बाधाओं को कम करना और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाना था। प्रस्तावित समझौते के तहत, दोनों पक्षों के लिए टैरिफ में कमी की उम्मीद है। इस समझौते में कृषि और अन्य उत्पादों तक पहुंच बढ़ाने के प्रावधान भी शामिल हैं। व्हाइट हाउस की एक फैक्ट शीट के अनुसार, भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बंद करने का वादा करने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने बाद में अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटा दिया।