☰
×

डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी निगरानी विवाद: क्या है असली कहानी?

अमेरिका में मिडटर्म चुनावों के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन चुनावी निगरानी को लेकर विवादों में है। न्याय विभाग ने 50 राज्यों में 1,000 चुनाव मॉनिटर तैनात किए हैं, जिसे डेमोक्रेटिक नेताओं और मतदाता अधिकार संगठनों ने आलोचना की है। कैलिफोर्निया में बैलेट विवाद और ट्रंप की गिरती लोकप्रियता भी चर्चा का विषय हैं। जानें इस मुद्दे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

अमेरिका में चुनावी निगरानी का बड़ा कदम


नई दिल्ली: अमेरिका में मिडटर्म चुनावों के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन चुनावी निगरानी को लेकर विवादों में उलझ गया है। मंगलवार को मतदान के समय, न्याय विभाग ने सभी 50 राज्यों में लगभग 1,000 चुनाव मॉनिटर और ऑब्जर्वर तैनात किए। इसे विभाग ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा निगरानी अभियान बताया है। हालांकि, इस निर्णय पर डेमोक्रेटिक नेताओं और मतदाता अधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं।


मॉनिटरिंग का उद्देश्य और विवाद

रिपोर्ट के अनुसार, मॉनिटर उन क्षेत्रों में भेजे गए हैं जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस ने ट्रंप को हराया था। इनमें से लगभग दो-तिहाई क्षेत्रों में अश्वेत और लातीनी मतदाताओं की संख्या अधिक है, और इनमें कई ऐसे राज्य भी शामिल हैं जो सीनेट में बहुमत तय करने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।


सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि न्याय विभाग चुनावी पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है। विभाग के अनुसार, ऑब्जर्वर संघीय मतदान कानूनों के अनुपालन पर नजर रखेंगे, लेकिन उन्हें मतदान केंद्रों पर तलाशी लेने या किसी मतदाता को वोट डालने से रोकने का अधिकार नहीं होगा।


डेमोक्रेटिक नेताओं की प्रतिक्रिया

मतदाता अधिकार संगठनों और डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस तैनाती को मतदाताओं में डर पैदा करने वाला कदम बताया है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि उनका राज्य भी अपने ऑब्जर्वर तैनात करेगा, जो संघीय मॉनिटरों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। लॉस एंजेलिस की मेयर कैरेन बास ने आरोप लगाया कि प्रशासन मतदाताओं को डराने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, ट्रंप प्रशासन चुनावी नतीजे अपने पक्ष में नहीं आने की स्थिति में उन्हें चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।


कैलिफोर्निया में बैलेट विवाद

यह निगरानी उस समय हो रही है जब कैलिफोर्निया में 20,000 से अधिक मेल-इन बैलेट को लेकर संघीय प्रशासन और राज्य सरकार के बीच कानूनी विवाद चल रहा है। ट्रंप प्रशासन ने आरोप लगाया था कि ये बैलेट गैर-नागरिकों को जारी किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन की याचिका खारिज कर दी थी, हालांकि बाद में कुछ फैसलों में बदलाव भी हुए।


ट्रंप की लोकप्रियता पर सवाल

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अधिकांश मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग भी काफी कम है। ईरान के साथ युद्ध, महंगा ईंधन और बढ़ती महंगाई मतदाताओं की नाराजगी के प्रमुख कारण हैं।


SSRS के एग्जिट पोल के अनुसार, लगभग आधे मतदाताओं ने चुनाव को ट्रंप के खिलाफ नाराजगी जताने का अवसर माना। लगभग तीन-चौथाई लोग देश की दिशा से असंतुष्ट थे, जबकि 70 प्रतिशत का मानना था कि कांग्रेस को राष्ट्रपति की शक्तियों पर अधिक नियंत्रण रखना चाहिए।